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चरखे से सूत कात कर तिरंगा बनाने वाले श्री गांधी आश्रम की नीलामी शुरू, 5.40 करोड़ रुपये का बकाया

Mon, 25 Jan 2021 01:05 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़
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रामघाट रोड स्थित क्षेत्रीय गांधी आश्रम का भवन - फोटो : अमर उजाला
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71वें गणतंत्र दिवस पर मंगलवार को पूरा देश धूमधाम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देगा। इस पावन मौके पर झकझोर देने वाली खबर इसी ध्वज को बनाने वाले 1962 में स्थापित क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम हरदुआगंज से आई है। चरखे से सूत कात कर तिरंगा बनाने वाले, राम धुन में डूबे रहने वाले इस ऐतिहासिक आश्रम की नीलामी शुरू हो गई है। वो भी, महज 5.40 करोड़ रुपये के बकाये के लिए। ये नौबत तब आई है, जब आश्रम के पास सात करोड़ रुपये के सूती कपड़ों व अन्य सामान का स्टाक है, लेकिन सरकारी खरीदारी नहीं होने से आश्रम कर्ज नहीं उतार पाया और नीलामी के दोराहे पर आ गया।
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सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बारहद्वारी शाखा की ओर से क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम हरदुआगंज, रामघाट रोड की नीलामी शुरू की गई है। इस आश्रम का क्षेत्रफल 5580.24 वर्गमीटर है, जिसकी कीमत लगभग साढ़े दस करोड़ रुपये आंकी गई है, लेकिन बैंक ने इसको साढ़े नौ करोड़ रुपये माना है। नीलामी का कारण बैंक का 5 करोड़ 37 लाख 23 हजार 11 रुपये का बकाया है।

बैंक ने 1980 में आश्रम प्रबंधन को 3.80 करोड़ रुपये की लिमिट दी थी। इस कर्ज के बढ़ने और उसका ब्याज बढ़ते-बढ़ते अब ये 5 करोड़ 37 लाख 23 हजार 11 रुपये तक पहुंच गया है, जिसकी वसूली के लिए बैंक ने नीलामी शुरू कर दी है। इसके लिए आरक्षित मूल्य 9.50 करोड़ रखा गया है। अर्नेस्ट मनी 95.07 लाख है। नीलामी बोली 25 फरवरी तक लगाई जा सकेगी।
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क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम के मंत्री संतोष मिश्रा ने बताया कि वह भरसक प्रयास करते रहे कि उनका कपड़ों का स्टाक बिक जाए। जैम पोर्टल पर पंजीयन भी कराया, लेकिन किसी सरकारी विभाग या एजेंसी ने खरीदारी नहीं की। इसकी वजह खादी वस्त्रों का महंगा होना भी है। अब वह सरकार से मांग कर रहे हैं कि उनके स्टाक को बिकवाने में मदद करें तो बैंक का बकाया चुकाया जा सकता है। इससे आश्रम की बेशकीमती जमीन बिकने से बच सकती है अन्यथा बैंक इसकी नीलामी कर देगा।

गौर हो कि क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम की अलीगढ़ में सात बेशकीमती जगह हैं, जिसमें बन्नादेवी आश्रम, हरदुआगंज आश्रम प्रथम, हरदुआगंज आश्रम द्वितीय, रेलवे रोड दुकान, गंगीरी, जवां, छर्रा अड्डा पुल के पास की दुकानें शामिल हैं। साथ ही इस आश्रम से जुड़ी प्रापर्टी मथुरा, हाथरस और लखनऊ में भी हैं। आश्रम प्रबंधन ने खादी ग्रामोद्योग आयोग मेरठ और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बारहद्वारी शाखा से इस जमीन को बेच कर कर्ज अदा कराने की अनुमति मांगी थी, लेकिन मंजूरी नहीं मिली। अब बैंक खुद ही गिरवी रखी गई जमीनों को नीलामी से अपनी वसूली करने जा रहा है।
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