निकाय चुनाव में हजारों मतदाताओं का नाम सूची से गायब होने एवं उर्दू में शपथ लेने के बाद हुए विवाद की गूंज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गई है। शहर विधायक संजीव राजा ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पूरी स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने जिलाधिकारी की शिकायत भी की और जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में उनकी भूमिका को संदिग्ध करार दिया। संजीव राजा ने गुरुवार को विधान सभा स्थित कार्यालय में मुख्यमंत्री से संक्षिप्त मुलाकात की। और अलीगढ़ में चल रहे राजनीतिक उठापटक से अवगत कराया। उन्होंने जिलाधिकारी की शिकायत की और कहा कि पूरी पार्टी उनके खिलाफ है। सबसे पहले उन्होंने नगर निगम चुनाव में हजारों मतदाताओं का नाम गायब होने की शिकायत की। मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम गायब होने के मामले में प्रशासन की भूमिका को संदिग्ध बताया। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी ने एक दल विशेष का पक्ष लिया। नगर निगम का शपथ ग्रहण समारोह इसका जीता-जागता प्रमाण है। एक पार्षद ने उर्दू में शपथ ली और प्रशासन मूक दर्शक बना रहा। संजीव राजा ने बताया कि सोमवार से गुरुवार के बीच मुख्यमंत्री जिले के सभी सातों विधायकों के साथ बातचीत करेंगे। उसमें पूरी स्थिति से अवगत कराया जाएगा।
सत्ता के दबाव में नहीं दर्ज की मेरी रिपोर्ट : मुशर्रफ
नगर निगम के शपथ ग्रहण समारोह में मंगलवार को उर्दू में शपथ लेने के बाद हुए विवाद से चर्चा में आए बसपा के वार्ड 54 से पार्षद मुशर्रफ हुसैन महजर ने कहा है कि उन्होंने अपनी शपथ उर्दू में ही ली है और इस मामले में किसी को गलतफहमी न हो। उन्होंने कहा कि महापौर सहित सभी पार्षदों के शपथ पत्र हिंदी में तैयार किए गए थे, लेकिन उन्होंने पूर्व घोषणा के अनुसार उर्दू में ही शपथ ली। उनका शपथ पत्र जरूर उन्हें हिंदी में थमा दिया गया था, लेकिन उन्होंने उसका उर्दू में तर्जुमा कर लिया। शपथ पत्र पर हस्ताक्षर अंग्रेजी में किए थे। मुशर्रफ हुसैन महजर ने कहा कि कुछ लोग जो यह बात कह रहे हैं कि उन्होंने हिंदी में शपथ ली है, वह गलतफहमी के शिकार हैं। अभी तक उनकी तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है, क्योंकि सत्ता का दबाव है। उन्होंने एसएसपी को गुरुवार को दूसरी तहरीर दी, जिसमें कहा गया कि शहर विधायक संजीव राजा, पूर्व महापौर शकुंतला भारती, पार्षद पुष्पेंद्र जादौन, हेमंत गुप्ता और लक्ष्मी नारायण उनकी हत्या कराना चाहते हैं। भविष्य में अगर उन पर कोई हमला या हत्या होती है, तो उसके जिम्मेदार यही लोग होंगे। इसलिए उन्हें सुरक्षा दी जाए। शुक्रवार को इस पत्र की प्रतिलिपि मुख्य सचिव गृह को भी भेजी जाएगी।
शकुंतला ने बाबा फरीद को उर्दू में दिलाई थी शपथ
नगर निगम के शपथ ग्रहण समारोह में उर्दू में शपथ लेने पर हुए हंगामे के बाद यह तथ्य सामने आया है कि बसपा पार्षद मुशर्रफ हुसैन पहले ऐसे पार्षद नहीं हैं, जिन्होंने उर्दू में शपथ ली है। इससे पहले सन 2013 में नगर निगम बोर्ड में पहुंचे तत्कालीन सपा नेता बाबा फरीद आजाद ने उर्दू में ही शपथ ली थी।
बाबा फरीद आजाद कहते हैं कि 20 अप्रैल 2013 को शासन से पार्षद नामित होने के बाद उनका शपथ ग्रहण समारोह हुआ था। समर्थकों के साथ वह जीप में सवार होकर जवाहर भवन के लिए घर से निकले थे। रास्ते में स्वागत और जाम के चलते वह आधा घंटा देरी से जवाहर भवन पहुंचे। तब तक शपथ ग्रहण समारोह समाप्त हो चुका था। जब बाबा फरीद आजाद पहुंचे तो महापौर शकुंतला भारती को सदन में फिर से आने के लिए आग्रह किया गया। इसके बाद महापौर फिर से सदन पहुंचीं और बाबा फरीद आजाद को उनके नोटिस के मुताबिक ही उर्दू में शपथ दिलाई। बाबा फरीद आजाद कहते हैं कि मंगलवार को शपथ ग्रहण समारोह में जो घटना हुई है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। महापौर और पार्षदों को जनता ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए चुना है। उन पर भरोसा दिखाया है। इसलिए उन्हें भी जनता के भरोसे को बनाए रखना चाहिए। भाजपा के कुछ नेेताओं और पार्षदों ने इससे पहले भी रसलगंज के शहीद स्मारक को धर्म के विवाद में घसीट लिया था। साथ ही सदन में राष्ट्रगान के समय भी अमर्यादित घटना को अंजाम दिया था। उम्मीद है कि अब सभी विकास के लिए काम करेंगे।
अगर शोरशराबे के बीच बाबा फरीद ने उर्दू में शपथ ले ली हो, तो मैं कुछ कह नहीं सकती लेकिन मेरी जानकारी में मेरे कार्यकाल में किसी भी पार्षद की शपथ उर्दू में नहीं हुई थी। अब भाजपा विरोधी दल तरह-तरह की बातें कर मामले को तूल देकर उलझाना चाहते हैं। इसीलिए इस तरह की बातें की जा रही हैं।
- शकुंतला भारती, पूर्व मेयर
मजिस्ट्रेटी जांच नहीं होगी मामला सुलझ गया : डीएम
नगर निगम शपथ ग्रहण समारोह में हुए विवाद के बाद भाजपा और बसपा आमने सामने हैं। शहर विधायक संजीव राजा ने सीएम योगी आदित्यनाथ से समारोह में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होने की शिकायत की है। इस पूरे प्रकरण में चार सवालों का जिलाधिकारी ऋषिकेश भास्कर याशोद ने जवाब दिया है।
अमर उजाला : बसपा पार्षद मुशर्रफ ने उर्दू में शपथ लेने के दौरान अपने हस्ताक्षर हिंदी में किए थे या अंग्रेजी में..? जबकि वह अंग्रेजी में हस्ताक्षर का दावा कर रहे हैं।
जिलाधिकारी : इस मामले की मुझे जानकारी नहीं है। नगर आयुक्त से पूछ लें।
अमर उजाला : शपथ ग्रहण के दौरान मारपीट के शिकार मुशर्रफ का कहना है कि उनके खिलाफ तो भाजपाइयों की तहरीर पर थाना बन्ना देवी में एफआईआर दर्ज कर ली गई। लेकिन उनकी तहरीर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जिलाधिकारी : अभी जनपद से बाहर हूं। आकर मामले को दिखवाऊंगा।
अमर उजाला : शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हुए हंगामे की क्या मजिस्ट्रेटी जांच कराई जा रही है। क्या इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी?
जिलाधिकारी : नहीं ऐसा कुछ नहीं है। जांच क्यों कराई जाएगी, सारा मामला सुलझा लिया गया है।
अमर उजाला : शहर विधायक संजीव राजा ने शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम न करने के लिए प्रशासन को दोषी ठहराया है और इसकी शिकायत विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की है।
जिलाधिकारी : सरासर गलत आरोप है। सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए थे। वहां दोनों पक्षों में उकसावे की कार्रवाई चली। हम सभी मौजूद थे और हमने ही मामला सुलझाया।
...तो विधानसभा में बसपा उठाएगी आवाज : रामवीर
बसपा से सादाबाद विधायक एवं पूर्व कबीना मंत्री रामवीर उपाध्याय ने कहा है कि अलीगढ़ नगर निगम शपथ ग्रहण समारोह में बसपा के मेयर फुरकान, पार्षद एवं नेताओं के साथ हुए अभद्र व्यवहार पर वह संवेदनशील हैं। अगर फुरकान ने उनसे कोई सहयोग मांगा, तो वह हर वक्त तैयार है। सभी पार्टी नेताओं की राय के बाद इस मामले को विधानसभा में भी उठाया जा सकता है। बसपा का कोई भी नेता कमजोर नहीं है, क्योंकि जनता बसपा के साथ है।
उन्हाेंने कहा अभी तक अलीगढ़ के मेयर मो. फुरकान ने उनसे इस बारे में कोई बात नहीं की है। अगर वे सहयोग मांगेंगे तो पूरी दमदारी से उनकी बात विधानसभा के अंदर रखी जाएगी। वह हमारी पार्टी के अच्छे और कर्मठ नेता हैं। मैं और पूरी पार्टी उनके साथ है।