जयगंज स्थित एक शोरूम में रखी रामलला की मूर्ति।
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रामनवमी 28 मार्च को मनाई जाएगी। इसके लिए अलीगढ़ के मूर्ति कारोबारियों ने देश-विदेश में प्रभु श्रीराम, राम-सीता-लक्ष्मण और राम दरबार की मूर्तियां भेजीं हैं। अयोध्या में स्थापित प्रभु श्रीराम की मूर्ति से मिलती-जुलती मूर्ति की खूब मांग हो रही है। रामनवमी के ऑर्डर पूरे करने के बाद कारोबारी लड्डू गोपाल और श्रीराधाकृष्ण की मूर्तियां बनाने में जुट जाएंगे। जन्माष्टमी सितंबर में मनाई जाएगी।
वर्तमान में पीतल लगभग 700 रुपये किलो है। इससे तैयार मूर्तियों का भाव 1000 रुपये किलो तक है। इस बार श्रीराम-सीता-लक्ष्मण की पांच इंच ऊंची और 600 ग्राम वजनी मूर्ति 500 रुपये तक की है, वहीं दो फीट ऊंची और 30 किलो वजनी बड़ी मूर्ति 21 हजार में है। 21 इंच ऊंचा और 25 किलो वजनी श्रीराम दरबार 20 हजार में है। अयोध्या की तर्ज पर बनी राम की मूर्ति 200 से 4000 रुपये में है।
नवरात्र पर मां दुर्गा की अष्टभुजी मूर्तियों की खूब मांग रही। माता की दो इंच ऊंची मूर्ति 150 और 25 इंच ऊंची मूर्ति 30 हजार रुपये मिल रही है। इन मूर्तियों की आपूर्ति पूरे देश में हो रही है। दक्षिण भारत के बेंगलुरू, चेन्नई, कोयंबटूर आदि शहरों में इनकी आपूर्ति हुई है।
अयोध्या में स्थापित श्रीराम की मूर्ति से मिलती जुलती मूर्ति की मांग तेजी से बढ़ी है। पूरे देश में जबरदस्त धार्मिक माहौल है, जिससे मूर्ति कारोबार को संजीवनी मिल रही है। अब हम लोग कृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियों में लग जाएंगे।
-हनुमंत राव गांधी, अध्यक्ष अलीगढ़ ब्रास स्टैच्यू एंड आर्टवेयर सप्लायर एसोसिशन।
रामनवमी पर प्रभु राम की मूर्तियों की मांग है। नवरात्र में मां दुर्गा के अलग-अलग आकार की मूर्तियां हाथोंहाथ ली गईं। अब कृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां शुरू करेंगे। पीतल महंगा न होता तो मांग और बढ़ सकती थी।
-दिनेश यादव, मूर्ति कारोबारी।