श्री टीकाराम मंदिर से निकलने वाली राम बरात 72 साल बाद मंदिर परिसर में ही घूमकर संपन्न हो गई। कोरोना संक्रमण का एहतियात यह था कि बारात सेंटर प्वाइंट चौराहे पर भी नहीं पहुंची। वैदिक आश्रम में बनने वाला जनवासा इस बार सूना रहा। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में ही रम बारात में शामिल होकर भोग प्रसाद का आनंद लिया। सैकड़ों श्रद्धालुओं को इस बात का मलाल रहा कि वह परंपरागत राम बारात में न तो सेवा कर पाए। न ही उसमें शामिल हो पाए।
मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधनकर्ता हरिप्रकाश गुप्ता ने कहा है कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए आयोजन सीमित रखा गया। मंदिर के पुजारी राजू पंडित ने बताया कि सीताराम विवाह महोत्सव की तैयारियां सुबह से ही प्रारंभ हो गई थीं। सबसे पहले भगवान का अभिषेक किया गया। इसके बाद पूजन, आरती, भोग जैसे परंपरागत कार्यक्रम दिनभर चले।
शाम को साढ़े छह बजे बरात निकाली गई। लेकिन इस बार बरात जनवासे से नहीं, मंदिर परिसर में ही निकली। जबकि 72 सालों से बरात अलीगढ़ शहर में घूमती थी। साढ़े छह बजे से लेकर रात एक बजे तक बरात मंदिर पहुंचती थी। इस बार दो घंटे मंदिर में बरात घूमी। इस दौरान भगवान राम को भोजन, पूजा, आरती विभिन्न घरों में कराया गया। इसके बाद रात को यजमान श्याम पंडितजी ने विवाह संपन्न कराया।
मुख्य अतिथि के रूप में प्रबंध न्यासी टीकाराम मंदिर परिवार धर्मार्थ ट्र्स्टी हरि प्रकाश गुप्ता और पवन गुप्ता मौजूद रहे। रामजी पंडित, डब्बू दालसेव वालों के यहां बरात पहुंची। इस मौके पर नवेंद्र पंडित, जय नारायण तिवारी आदि मौजूद रहे।
गिलहराज मंदिर में भी हुआ आयोजन
सीताराम विवाह महोत्सव का आयोजन गिलहराज मंदिर में हुआ। यह आयोजन परंपरागत तरीके से किया गया। राम बरात मंदिर से प्रारंभ होकर रामलीला ग्राउंड, पालीवाल स्कूल होते हुए वापस मंदिर आई। योगी कौशलनाथ ने बताया कि मान्यता है कि आज ही के दिन त्रेतायुग में भगवान राम का विवाह हुआ था। इसीलिए इस विवाहोत्सव का आयोजन किया गया। आचार्य सुमित कृष्ण शास्त्री ने भगवान राम और सीता का विवाह संपन्न कराया। इस मौके पर मीडिया प्रभारी राज सक्सेना, कृष्ण गुप्ता, उमेश वार्ष्णेय, ईशा गुप्ता, प्रशांत समाधि, दीपांश सक्सेना, विक्की अग्रवाल, नंदनी वार्ष्णेय, कामिनी उपाध्याय, सीता गोयल, कौशल कुमार वार्ष्णेय, सोनी, दीक्षा, यति वार्ष्णेय, प्रखर वार्ष्णेय, अरविंद गिरी स्वामी आदि मौजूद रहे।