प्रतिबंधित विदेशी पिस्टल रखने के मामले में जेल भेजे गए छर्रा विधानसभा के पूर्व सपा विधायक ठा. राकेश सिंह से मिलने सपा के चार विधायकों की जांच कमेटी रविवार को अलीगढ़ जिला कारागार पहुंची। इन विधायकों ने एक घंटे तक राकेश सिंह से अकेले में बात की। बाहर आकर उन्होंने आरोप लगाया कि राकेश सिंह को योगी सरकार ने साजिश के तहत फंसाया है। मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग करते हुए उन्होंने इस मुद्दे पर आंदोलन चलाने की चेतावनी दी। वे जेल में बंद सपा नेता रंजीत सिंह और राघवेंद्र सिंह कालू से भी मिले।
इस जांच कमेटी में कानपुर की आर्यनगर सीट से अमिताभ वाजपेयी, अमेठी जिले की गौरीगंज सीट से राकेश प्रताप सिंह, बदायूं की सहसवान सीट से ओंकार सिंह यादव और मैनपुरी से विधायक राज कुमार यादव राजू शामिल थे। प्रोटोकाल के अनुसार जेल का मुख्य द्वार खोल कर विधायकों को अंदर ले जाया गया। उनके साथ पूर्व शहर विधायक जफर आलम, जिलाध्यक्ष अशोक यादव, पूर्व महानगर अध्यक्ष अज्जू इसहाक, वर्तमान महानगर अध्यक्ष जावेद अजीज, प्रदेश कायकारिणी सदस्य विनोद सविता भी गए। राकेश सिंह से पूरा घटनाक्रम जाना। जेल में बंद सपा छात्र सभा के जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह से भी मिले। इसके अलावा जेल में बंद युवजन जिलाध्यक्ष राघवेंद्र सिंह कालू से भी मिले।
जेल से बाहर आने पर मीडिया से मुखातिब चारों विधायकों ने एकमत होकर कहा कि पूर्व विधायक राकेश सिंह को फर्जी मुकदमे में जेल भेज गया है। वह शोषितों की बात उठाते रहे हैं, जो अधिकारियों के लिए तकलीफदेह साबित होती है। ऐसे ही कुछ अधिकारियों की पीठ पर सरकार का हाथ रहा है। साजिश रच कर योगी सरकार के इशारे पर सपा नेता को जेल भेज दिया गया। अखिलेश यादव के निर्देश पर वह चारों विधायक जांच कमेटी की शक्ल में अलीगढ़ आए हैं। विधायकों ने कहा कि राकेश के परिजनों से भी विस्तृत बात हुई है। अब इसकी रिपोर्ट पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को दी जाएगी। दस दिनों के अंदर इस पर पार्टी निर्णय लेगी। निश्चित तौर पर इस साजिश के खिलाफ सड़क से संसद तक आंदोलन होगा।
मामले की न्यायिक जांच होनी आवश्यक है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। गिरफ्तारी के दिन एसपी सिटी सहित पुलिस अमला अचानक राकेश सिंह के घर पहुंचा। एसपी सिटी के दफ्तर ले चलने की बात हुई। बाद में क्वार्सी थाने ले जा कर फर्जी मुकदमों के कागजात पर जबरन हस्ताक्षर करा लिए गए।
विधायकों ने कहा कि जेल में बंद पूर्व विधायक राकेश सिंह ने मुलाकात के दौरान बताया कि घटना के वक्त उन्हाेंने रिश्तेदार की लाइसेंसी पिस्टल पुलिस को दी थी। जिसे क्वार्सी थाने में बदल दिया गया। पुलिस ने घटना के वक्त का एक वीडियो दिखाया था। अब अगर इस वीडियो और प्रकरण की न्यायिक जांच हो तो सब कुछ साफ हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि राकेश सिंह का उत्पीड़न मुकदमे से पहले ही शुरू हो गया था। 20 दिनों में 35 बार उनका गनर बदला गया। जब इसमें सफलता नहीं मिली तो फर्जी मुकदमा लगाया गया। विधायक दल ने कहा कि सरकार खिलाफत में उठने वाली आवाज को दबा रही है। विधायक दल के जेल के अंदर जाने से लेकर बाहर आने तक सपा समर्थक नारेबाजी करते रहे।
जेल में राकेश के उत्पीड़न का आरोप
विधायकों ने आरोप लगाया कि जेल में राकेश सिंह का उत्पीड़न हो रहा है। पूर्व एमएलए को मिलने वाली सुविधाएं नहीं मिल रही है। आम बंदियों से भी बुरा बर्ताव हो रहा है। पूर्व विधायक को उनके परिजनों से मिलने नहीं दिया जा रहा है। इलाज नहीं कराया जा रहा है। जिस बैरक में वह बंद हैं, वहां मच्छर और गंदगी बहुत है। खाना भी घटिया दर्जे का दिया जा रहा है। जब विधायक दल से पूछा गया कि वह इस प्रकरण में इतने दिन बाद क्यों आए तो उन्होंने बताया कि विधानसभा सत्र और गोरखपुर- फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में व्यस्तता के कारण वह लेट हो गए। अब योगी सरकार को हरा कर आए हैं।
उत्पीड़न के आरोप बेबुनियाद : जेल प्रशासन
पूर्व विधायक राकेश सिंह का जेल में उत्पीड़न होने के आरोपों को जेल प्रशासन ने सिरे से नकार दिया। जेल अधीक्षक आलोक सिंह ने बताया कि नियमानुसार शासन और गृह विभाग की अनुशंसा पर पूर्व विधायक को कुछ अतिरिक्त सुविधाएं मिलती हैं। राकेश सिंह के प्रकरण में अभी तक कोई निर्देश नहीं आया है। इसलिए उनको सामान्य बंदी को तरह रखा गया है। इलाज नहीं कराने का आरोप निराधार है। एक दिन उनकी तबियत बिगड़ी़ थी तो सीएमओ डा. एमएलए अग्रवाल के नेतृत्व में डाक्टरों की टीम ने रात में ही उपचार दिया था। तब से वह स्वस्थ हैं।
भाजपा विधायकों ने भी राकेश से की मुलाकात
भाजपा के शहर विधायक संजीव राजा और कोल विधायक अनिल पाराशर रविवार को कुछ बंदियों से मिलने पहुंचे। जेल अधीक्षक आलोक सिंह ने उनको अंदर ले जाकर व्यवस्थाओं के बारे में बताया। इस दौरान दोनों विधायकों ने सपा के पूर्व विधायक राकेश सिंह से भी उनका कुशलक्षेम जाना।
रंजीत सिंह की पत्नी को थाने लाना गलत
सपा छात्र सभा के जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह के प्रकरण में सपा जांच कमेटी ने कहा कि रंजीत सिंह की पत्नी को घर से इस तरह से थाने लेकर आना सरकार की घटिया मानसिकता का परिचय है। रंजीत सिंह कोई आतंकवादी नहीं हैं जो कि उनकी पत्नी को घर से उठा लिया गया। पार्टी पदाधिकारियों को भी उनसे मिलने नहीं दिया गया। कहा कि इस प्रकरण पर भी पार्टी नेतृत्व से बात करेंगे।