फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजा जय किशन और नवाब मोहसिन थे सर सैयद के हमराह

विज्ञापन
विज्ञापन
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद ज्ञान और समाज सुधार की जो मशाल लेकर चल रहे थे, इस मुहिम में उनके करीबी नवाब मोहसिन उल मुल्क मौलवी मेहंदी अली खान और राजा जय किशन दास भी शामिल थे।
विज्ञापन

राजा जय किशन दास (1832-1905) सर सैयद के बेहद करीबी दोस्तों में से एक थे। राजा जय किशन मुरादाबाद के वृंदावन दास चौबे के दूसरे पुत्र थे। राजा जय किशन दास आधुनिक सोच के उदारवादी और वैज्ञानिक विचारधारा रखने वाले व्यक्ति थे। सर सैयद के साथ उनकी गहरी दोस्ती के कई उदाहरण देखने को मिलते हैं। जय किशन सर सैयद के पौत्र रॉस मसूद से बहुत प्रेम मानते थे। जब सर सैयद का तबादला 1867 में बनारस के लिए हुआ तो वह अलीगढ़ में साइंटिफिक सोसायटी का सारा काम राजा जय किशन दास को सौंप गए थे। राजा जय किशन दास ने 1874 तक साइंटिफिक सोसाइटी के सेक्रेटरी का काम किया।
वहीं, नवाब मोहसिन उल मुल्क मौलवी मेहंदी अली खान (1837-1907) मौलवी मेहंदी अली खान को नवाब मोहसिन उल मुल्क के नाम से भी जाना जाता है। यह सर सैयद के बेहद करीबी सहयोगियों में से एक थे। इनका जन्म इटावा में हुआ और वह तहसीलदार के पद पर नियुक्त हुए। बाद में यह डिप्टी कलेक्टर भी बने। इन्होंने बाद में हैदराबाद के निजाम में भी अपनी सेवाएं दीं। अलीगढ़ आंदोलन के यह समर्थक थे। सर सैयद के बाद यह मोहम्डन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज के सेक्रेटरी भी बनें। इन्होंने कई मशहूर किताबें भी लिखीं। शिमला में इनकी मृत्यु हुई। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में इनके नाम पर एक छात्रावास बना हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें