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सांसदों के प्रयास झूठे, या प्रभु ही रूठे

Fri, 26 Feb 2016 01:58 AM IST
अलीगढ़
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प्रभु की रेल बजट की कुछ ट्रेनें अलीगढ़ में भी ठहरेंगीं, इस बात की उम्मीद बहुत से लोग लगाए हुए बैठे थे, लेकिन बजट में अलीगढ़ और हाथरस के नाम पर कोई घोषणा नहीं हुई है। बरेली और दक्षिण भारत के लिए सीधे ट्रेन की मांग भी हो रही थी जो कि पूरी नहीं हुई।
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ऐसे में यह प्रश्न विचारणीय है कि क्या भाजपा सांसदों ने स्थानीय स्टेशनों पर कुछ ट्रेनों के ठहराव के लिए प्रयास ही नहीं किए या प्रयास तो किए लेकिन प्रभु ने ही बात नहीं सुनी। इस विषय पर विभिन्न लोगों की प्रतिक्रिया कुछ इस तरह थी। 
‘इस रेल बजट में वादे बहुत हैं। बजट देखकर तो ऐसा लग रहा है कि पता नहीं क्या होने वाला है। लेकिन हकीकत की जमीन पर कुछ होता दिखाई नहीं दे रहा है। वक्त की मांग है कि कुछ ट्रेनों का ठहराव अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर होता तो जिले के उद्योग और विकास को गति मिलती। जो संसाधन हैं उनको ही दुरुस्त और सुचारु करने पर बल दिया होता तो कुछ और बात होती’- लालजी वर्मा, कोल्ड स्टोरेज, कारोबारी
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‘कभी लंबे समय से कानपुर-दिल्ली शताब्दी के ठहराव और इलाहाबाद देहरादून लिंक एक्सप्रेस से जुड़ने वाली संगम एक्सप्रेस को मेरठ से बढ़ाकर सहारनपुर तक विस्तार करने की मांग चली आ रही है। इसके लिए स्थानीय स्तर से लेकर मंत्रालय स्तर पर प्रयास किए गए हैं। उम्मीद थी बजट में इस पर कुछ फोकस मिलेगा लेकिन कुछ दिखाई नहीं दिया’- डॉ. सुहेल अहमद आजमी, जेएन मेडिकल कॉलेज
‘बजट में रेलवे स्टेशन पर सुविधाएं बढ़ाने और आगे की एडवांस बात करने से बेहतर होता अगर मौजूदा ट्रेनों को ही समय पर चलाने की कोई ठोस योजना बनाई होती। इससे स्टेशन पर यात्रियों के रुकने के समय में कमी आती तो साथ ही स्टेशन पर संसाधनों की जरूरत भी कम पड़ती। जैसे अगर किसी की ट्रेन सही समय पर है तो वह मात्र 10 मिनट ही प्लेटफार्म पर स्टे करेगा’- मारिया आलम, सामाजिक कार्यकर्ता
‘जो सुविधाएं घोषित की है वह राष्ट्रीय स्तर पर हैं। स्थानीय रेलवे स्टेशन पर समस्याएं ही समस्याएं हैं। इस प्रकार के रेलवे स्टेशनों के लिए या तो कोई घोषणा नहीं की गई है या फिर अलीगढ़ के स्टेशन का नाम ऐसे स्टेशनों में नहीं है। रेलवे की जो तस्वीर स्थानीय रेलवे स्टेशन पर दिखाई देती है वह बेहद डराने वाली है’- प्रतिभा राघव, सामाजिक कार्यकर्ता
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