विधायक अनिल पराशर ने किया निरीक्षण
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सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए लगातार प्रयासरत है, मगर डॉक्टरों की कमी लगातार परेशानी का सबब बन रही है। दीनदयाल संयुक्त अस्पताल में रेडियोलॉजी विभाग पूरी तरह बंद हो गया है और उसके आईसीयू संचालन पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसके पीछे मुख्य वजह यहां से चार विषय विशेषज्ञ डॉक्टरों का कार्यमुक्त किया जाना है, जबकि उनके स्थान पर किसी नए की तैनाती नहीं की गई है।
जून 2022 में प्रदेश स्तर पर डॉक्टरों के तबादले का क्रम शुरू हुआ। उस वक्त जिले से भी डॉक्टरों के तबादले किए गए। इसके बाद नए डॉक्टरों के मिलने में अभी तक बाधा है। जो विषय विशेषज्ञ यहां से स्थानांतरित किए गए, उनके स्थान पर नई तैनाती नहीं की गई। पिछले दिनों संविदा पर जरूर कुछ डॉक्टर आए है।
दीनदयाल अस्पताल के 4 विषय विशेषज्ञ कार्यमुक्त नहीं किए गए थे। अब उन्हें शासन के निर्देश पर अपर निदेशक ने कार्यमुक्त कर दिया है। अगर ऐसा न किया जाता तो उनकी तनख्वाह निकलने में दिक्कत होती। इससे रेडियोलॉजी विभाग में काम पूरी तरह बंद हो गया। अल्ट्रासाउंड आदि नहीं हो सकेंगे। इसी तरह हड्डी रोग व कॉर्डियोलॉजी विशेषज्ञ के कार्यमुक्त होने के कारण आईसीयू के संचालन में भी दिक्कत है।
यहां 38 वेंटिलेटर बेड का आईसीयू है, लेकिन 10 बेड पर ही मरीजों को सेवाएं दी जा सकती हैं। एक एनेस्थेटिक व दो मेडिकल अफसर तैनात हैं। बाकी जरूरत पर अन्य विषय विशेषज्ञ तलब किए जाते हैं। मात्र 6 स्थायी व 6 संविदा डॉक्टरों के सहारे इमरजेंसी व ओपीडी सेवाएं चल रही हैं।
डॉक्टर न होने के कारण आईसीयू संचालन में दिक्कत आ रही है, जैसे तैसे काम चलाया जा रहा है। रेडियोलॉजी पूरी तरह बंद हो गई है। कॉर्डियोलॉजी और हड्डी रोग का काम भी प्रभावित होगा। नेत्र रोग में सहायकों के जरिये काम चलाया जाएगा। डॉक्टरों के लिए लगातार शासन व स्थानीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
- डॉ. अनुपम भाष्कर, सीएमएस दीनदयाल अस्पताल
ये डॉक्टर किए गए कार्यमुक्त
- डा.एसके उपाध्याय, हड्डी रोग विशेषज्ञ
- डा.जगमोहन शर्मा, रेडियोलॉजिस्ट
- डा.संजय कुमार सिंघल, कॉर्डियोलॉजिस्ट
- डा.श्वेता रानी, दंत रोग विशेषज्ञ
विधायक ने किया दीनदयाल अस्पताल का निरीक्षण
विधायक अनिल पाराशर ने रविवार सुबह दीनदयाल अस्पताल गए का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि आलम ये है कि सीएमएस अस्पताल परिसर में नहीं रहते। आईसीयू में एनेस्थेटिक एक घंटे बाद आए। देहात के सीएचसी-पीएचसी पर विषय विशेषज्ञ तैनात हैं। उन्हें जिला स्तर के अस्पतालों में क्यों नहीं लगाया जा रहा। यह स्थानीय अधिकारियों की अपनी हठधर्मिता का परिचय है। शासन स्तर से डॉक्टरों के लाने का वे अपने स्तर से प्रयास कर रहे हैं। मरीजों को अगर किसी तरह की परेशानी होती है तो इसके लिए स्थानीय अफसर जिम्मेदार होंगे। जवाबदेहों पर कार्रवाई कराई जाएगी।