आखिर जिला प्रशासन क्यों चुप्पी साधे बैठा है? ओजोन-सांसद विवाद में आखिर कौन सही है? इसका फैसला कौन करेगा और कब? हर दिन एक नई रिपोर्ट जमीन की खरीद फरोख्त के संबंध में सामने लाई जा रही हैं। अब सच कौन सी रिपोर्ट में है ये कैसे तय मान लिया जाए। कल तक एसीएम और एसडीएम की जांच रिपोर्ट सामने आईं और अब एडीएम प्रशासन की एक रिपोर्ट सामने आई है। इसमें फिर से ओजोन पक्ष को गलत माना गया है। जब पहली दो रिपोर्ट की सत्यता पर सवाल है तो इसे भी कैसे सत्य मान लिया जाए। इसलिए अब जरूरत है प्रशासन के स्तर से सच सामने लाने की। ताकि सभी के दावों पर विराम लग सके।
ये है एडीएम प्रशासन की रिपोर्ट में
एडीएम प्रशासन डीपी पाल की ओर से सबसे आखिर में 24 अगस्त 2022 को एक जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी गई है। जिसमें कहा गया है कि जांच में महेंद्र नगर की राजवती को सही माना गया है, जो पूर्व में असदपुर कयाम की रहने वाली है। उसी महिला ने मनोज गौतम को बैनामा किया है। वहीं केला नगर की राजवती के विषय में कहा गया है कि उसका केला नगर में मायका था। ससुराल बुलंदशहर में थी। उसके पति सरकारी सेवा में थे और उनकी पैतृक संपत्ति भी थी। इसलिए उस महिला को पट्टा नहीं हो सकता। केला नगर की महिला के विषय में बुलंदशहर के गांव रतनपुर के प्रधान, वहां के भू अभिलेख आदि भी इस रिपोर्ट में लगे हैं। जिसके आधार पर कहा गया है कि यहां इसे पट्टा नहीं हो सकता। साथ में केला नगर की इस राजवती नाम की महिला के द्वारा हाथरस के पते पर भी एक मुख्तारनामा दर्शाया गया है। बाद में वह भी कूटरचित करार दिया गया है। अंत में महेंद्र नगर की राजवती को सही कहते हुए मनोज गौतम के बैनामे को सही करार दिया है।
सडक़ मामले में एडीए वीसी का बयान
ओजोन सिटी की सडक़ एडीए द्वारा निर्मित कराए जाने के छह माह बाद उखडऩे के मामले में एडीए हरकत में आया है। उखडऩे के बाद जिस सडक़ निर्माण की गुणवत्ता की जांच कमिश्रर स्तर से कराई गई। उस जांच के आधार पर तत्कालीन एडीए वीसी ने ठेकेदार व अभियंताओं से जवाब तलब किए गए। उनकी ओर से एक वर्ष बाद भी कोई गतिविधि नहीं हुई। इस मामले में एडीए वीसी अतुल वत्स का कहना है कि ओजोन सिटी की सडक़ के निर्माण के बाद उसके जल्द खराब हो जाने का प्रकरण संज्ञान में आया है। क्योंकि प्रकरण काफी पुराना है। सोमवार को प्रकरण की संपूर्ण जानकारी कर समुचित जांचोपरांत संबंधित पर प्रस्तावित करवाई की जाएगी।