कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते सरकार द्वारा किए गए लॉकडाउन में क्या बच्चे, क्या बड़े सभी की जिंदगी घरों में कैद होकर रह गई है। इस स्थिति से एक विशेष प्रकार की मानसिक खीज पैदा होती है।
क्योंकि सामान्यत: मनुष्य इस प्रकार की स्थिति के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं होते। इन हालातों में बच्चों और अभिभावकों को क्या करना चाहिए, इस विषय में मनोवैज्ञानिक सलाहकार डॉ. पूनम बत्रा कुछ उपाय बता रही हैं, जो उपयोगी साबित हो सकते हैं।
डॉ. पूनम बत्रा के सुझाव
-लगातार टीवी पर बीमारी के फैलने संबंधी खबरों को न देखें। कुछ परिवर्तन करते रहें।
- शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दें।
- शारीरिक रूप से सक्रिय रहें ,संभव हो तो घरेलू कार्य में महिलाओं की सहायता करें।
- बच्चों के साथ इनडोर एक्टिविटी में शामिल हों।
- कोई नया स्किल सीखें, नई लैंग्वेज, नई हाबी या अपनी पुरानी हॉबी को ही आगे विकसित किया जा सकता हैं।
- अपनी दिनचर्या को वैसी ही रखें जैसी सामान्य दिनों में रखते हैं। समय पर नहाएं, खाना खाएं, काम निपटाएं।
- अपने आसपास के पशु पक्षियों का भी ध्यान रखें ।
- अपने आप को याद दिलाएं लॉक डाउन सिर्फ 21 दिनों का है स्थयी नहीं है।