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बैंकों में लटके ताले, कई एटीएम हुए ठप, 400 करोड़ का लेनदेन प्रभावित

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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा पर विरोध प्रदर्शन करते कर्मचारी। - फोटो : CITY OFFICE
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निजीकरण समेत 14 सूत्री मांगों को लेकर बैंकों की दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल जिले में प्रभावी रही। जिले की 294 बैंक शाखाओं में तालाबंदी की स्थिति रही। 400 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन प्रभावित हुआ। सबसे ज्यादा असर एटीएम व्यवस्था पर पड़ा, पहले ही दिन दर्जनों एटीएम ठप हो गए। बैंक कर्मचारियों ने आल इंडिया नेशनलाइज्ड बैंक आफीसर्स फेडरेशन के बैनरतले केनरा बैंक की जिला पंचायत शाखा एवं यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस के बैनरतले भारतीय स्टेट बैंक मुख्य शाखा पर धरना प्रदर्शन किया। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि निजीकरण किसी के हित में नहीं है। फेडरेशन के राज्य समिति सदस्य अतुल सिंह ने बताया कि मंगलवार को केनरा बैंक की धनीपुर शाखा पर धरना प्रदर्शन होगा।
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जिला पंचायत परिसर स्थित केनरा बैंक शाखा पर धरने को संबोधित करते हुए आल इंडिया नेशनालाइज्ड बैंक आफिसर्स फेडरेशन (एआईएनबीओएफ) के राज्य समिति सदस्य अतुल सिंह ने कहा कि निजीकरण किसी के हित में नहीं है। इससे रोजगार प्रभावित होगा। नीरज चौहान, गौरव सिंह, स्नेहलता, आशुतोष पांडेय, पीके सिंह, अल्पिका, सोनपाल व सचिन ने निजीकरण से होने वाले नुकसान पर चर्चा की। संचालन केनरा बैंक आफिसर्स एसोसिएशन के क्षेत्रीय अध्यक्ष राकेश कुमार ने किया। उन्होंने बताया कि मंगलवार को केनरा बैंक की धनीपुर शाखा पर 10 बजे से धरना प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस मौके पर जिला सचिव सुशील मजूमदार, सौम्या, मानसी, रस्मीत, श्रुति, वैभव, अभिनव, अनंत, आनंद, नीरज, प्रदीप, रवि, राखी, ओजस्विनी, अनामिका आदि मौजूद रहे।
एसबीआई मुख्य शाखा पर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले हुए धरने के दौरान यूनियन के संयोजक वीके शर्मा ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्रों का परिचालन लाभ निरंतर बढ़ रहा है, लेकिन सरकार खराब ऋणों की वसूली की अक्षमता को छिपाने के लिए बैंकों को घाटे में डाल रही है। सरकारी बैंकें पूरी जिम्मेदारी से काम कर देश की जनता की सेवा कर रही हैं तो दूसरी तरफ निजी बैंकें आज भी फेल हो रही हैं। उन्होंने बताया कि देशव्यापी हड़ताल के दूसरे दिन भी अधिकारी एवं कर्मचारी एसबीआई मुख्य शाखा पर धरना प्रदर्शन करेंगे। इस मौके पर बड़ी संख्या में बैंक अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
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ये रहीं मुख्य मांगे
- सार्वजानिक क्षेत्रों का निजीकरण रोका जाए।
- बड़े खराब ऋणों की वसूली के लिए कठोर कानून बनाए जाए।
-निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया जाए।
- जानबूझकर ऋण न चुकाने को अपराध की श्रेणी में माना जाए।
व्यापारी भी बैंकों के समर्थन में आए
बैंकों के निजीकरण के विरोध में बैंकों की दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को व्यापारियों ने भी समर्थन दिया है। इस मामले में सोमवार को उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की बैठक महानगर अध्यक्ष सतीश माहेश्वरी की अध्यक्षता में समर्पण कांप्लेक्स कार्यालय पर हुई। इसमें व्यापारियों ने सरकारी बैंकों के निजीकरण को व्यापारियों एवं देश के लिये घातक करार दिया।
महानगर मंत्री दिनेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि आज भी व्यापारी समाज का विश्वास सरकारी बैंकों पर है। पिछले वर्षों में कई प्राइवेट बैंक बंद हुए हैं और इससे उसके ग्राहक आज भी समस्या से जूझ रहे हैं। बांड धारक अभी तक अपनी बचत का पैसा लेने में असमर्थ रहे हैं। चेयरमैन ओपी राठी ने देश हित व व्यापारियों के हित में सरकारी बैंकों की आवश्यकता पर बल दिया।
साथ ही सरकारी बैंकों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने व अनुशासन को बनाये रखने का आह्वान किया। जिलाध्यक्ष कमल गुप्ता ने आगाह किया कि सरकार ऐसी नीति बनाए कि सरकारी बैंक मैनेजर व्यापारियों को बिना परेशानी के भारत सरकार की नीति के अंतर्गत सुविधा दें । इस मौके पर महामंत्री श्रीकृष्ण गुप्ता, कोषाध्यक्ष विवेक शर्मा, युवा अध्यक्ष अशोक कुमार गुप्ता, सासनीगेट अध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल, उपाध्यक्ष घनश्याम दास जैन, गर्वित माहेश्वरी आदि मौजूद रहे।
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