जीवनगढ़ पुलिया स्थित अलीगढ़-अनूपशहर रोड पर धरना दे रहीं महिलाओं को समझाने की कई बार कोशिश की गई, लेकिन वह यहां से उठने को तैयार नहीं हैं। इलाके के मुअज्जिज लोगों की गुहार को महिलाओं ने मानने से इनकार कर दिया।
तीन दिन से चले आ रहे धरने से इलाके के मुअज्जिज लोग भी परेशान हैं। कई बार पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से इन लोगों ने बातचीत की, लेकिन जब वह धरना खत्म करने का संदेश धरना स्थल पर लेकर पहुंचते तो उन्हें किसी भी कीमत पर न उठने का संदेश देकर महिलाएं वापस भेज देतीं। बहरहाल, यह कोशिश इलाके के समझदार लोगों की तरफ से कई बार की गई, लेकिन उनकी हर कोशिश पर महिलाओं ने अपनी जिद से पानी फेर दिया। वहीं यह बात भी सामने आ रही है कि स्थानीय दुकानदार व निवासी धरना हटाने के पक्ष में आ गए हैं। मगर यहां धरने पर मौजूद बाहरी लोग धरना हटाने के मूड में नहीं हैं। इसे लेकर भी आपस में शिकवा शिकायत का दौर शुरू हो गया है। पुलिस तक इस तरह की शिकायतें भी पहुंच रही हैं कि उन्हें जबरन धरने में बैठाया जा रहा है या रास्ते से निकलने पर रोका जा रहा है।
मुझे सीएए से नहीं एनआरसी से डर लगता है
अलीगढ़-अनूपशहर रोड पर धरने पर बैठीं रहीं महिलाओं ने कहा कि मुझे नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) से डर नहीं लगता, क्योंकि यह कानून नागरिकता देने के लिए है न कि छीनने के लिए। मगर एनआरसी व एनपीआर से डर लगता है, क्योंकि इससे नागरिकता पर सवाल खड़े कर दिए जाएंगे। किसी की नागरिकता पर सवाल खड़े का अधिकार किसी एक अधिकारी को किसने दिया। महिलाओं ने कहा कि जो घुसपैठिया है, उसे खुफिया एजेंसी अब तक क्यों नहीं तलाश पाई है। महिलाओं ने कहा कि इंसाफ नहीं मिलने तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
चार दौर की वार्ता विफल, रात 12 बजे फिर वार्ता
अलीगढ़। वेट एंड वाच की नीति पर चल रहा प्रशासन अब पीस कमेटी एवं मुअज्जिज लोगों के साथ धर्म गुरुओं के सहारे आंदोलनकारियों को मनाने में जुटा हुआ है। जीवनगढ़ धरने में बैठे लोगोें को स्थानीय पार्षद, मौलाना, मौलवी आदि के माध्यम से समझाने के लिए देर सायं तक चार दौर की वार्ता हुई। लेकिन आंदोलनकारियों के सीएए एवं एनआरसी को खत्म करने की मांग पर अड़े रहने एवं स्थानीय स्तर की कोई मांग न करने के कारण वार्ताएं विफल हो गई। एसीएम द्वितीय रंजीत सिंह ने बताया कि रात 12 बजे एक और वार्ता होनी है। इसमें कोई हल निकलने के आसार हैं।