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Aligarh Nagar Nigam: वसूली तो है दूर की बात, 1.96 लाख घरों तक नहीं पहुंचे संपत्ति कर बिल, इंतजार कर रहे लोग

Thu, 19 Jun 2025 12:27 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

नगर निगम द्वारा पांच साल जीआईएस सर्वे कराया गया था। इस सर्वे में 2.89 हाउस होल्ड चिह्नित हुए। मगर इन पांच साल में पूरे हाउस होल्ड से कर विभाग संपत्ति कर वसूल नहीं सका। इसके पीछे कर्मचारियों और संसाधनों की कमी बताई जा रही है। इससे संपत्ति कर के बिल भी लोगों तक नहीं पहुंच रहे।
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अलीगढ़ नगर निगम - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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संपत्ति कर की वसूली करना तो छोड़िए नगर निगम तो बिलों का भी वितरण नहीं करा पा रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1.96 लाख घरों तक बिल नहीं पहुंचे हैं। अब लोगों को डर सता रहा है कि अगर दोनों साल का बिल जुड़कर आएगा तो उन पर संपत्ति कर का बड़ा बोझ भी पड़ेगा। वहीं यह स्थिति सामने आने के बाद नगर आयुक्त ने शहर के नए आवासीय और अनावासीय क्षेत्रों का ड्रोन सर्वे कराने की कवायद शुरू की है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर पार्षदों ने सवाल खड़े किए हैं और ड्रोन सर्वे का विरोध जताया है।

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नगर निगम द्वारा पांच साल जीआईएस सर्वे कराया गया था। इस सर्वे में 2.89 हाउस होल्ड चिह्नित हुए। मगर इन पांच साल में पूरे हाउस होल्ड से कर विभाग संपत्ति कर वसूल नहीं सका। इसके पीछे कर्मचारियों और संसाधनों की कमी बताई जा रही है। इससे संपत्ति कर के बिल भी लोगों तक नहीं पहुंच रहे। पिछले साल 2024-25 के राजस्व वसूली के आंकड़ों पर गौर करें तो कर विभाग ने 92,979 भवनों से राजस्व वसूली कर रिकार्ड कायम किया था। ऐसे मेें लगभग 1.96 लाख मकानों को संपत्ति कर के बिल नहीं भेजे जा सके हैं। इसकी वजह से निगम को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। 

नगर निगम के अधिकारी ने बताया कि पिछले जीआईएस सर्वे में कई मकानों और व्यावसायिक संपत्तियों को शामिल ही नहीं किया गया। इसके अलावा, गलत डेटा और अपूर्ण जानकारी के कारण बिल वितरण में भारी दिक्कतें आ रही हैं। इस लापरवाही के कारण न केवल निगम की आय प्रभावित हो रही है, बल्कि शहर की बुनियादी सुविधाओं के विकास पर भी असर पड़ रहा है। इन सब समस्याओं को देखते हुए नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने शहर के आवासीय और अनावासीय क्षेत्रों का ड्रोन से जीआईएस सर्वे कराने का फैसला किया है। इस सर्वे का उद्देश्य सभी संपत्तियों का सटीक डेटा एकत्र करना और बिल वितरण प्रक्रिया को सुचारु करना है। ड्रोन सर्वे के जरिए निगम नए निर्माणों, अवैध निर्माणों, और उन संपत्तियों को चिह्नित करना चाहता है, जो अब तक कर के दायरे से बाहर हैं। हालांकि यह पहल शुरू होने से पहले ही जीआईएस सर्वे विवादों में घिर गई है। 

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पार्षदों का कहना है कि ड्रोन सर्वे से न केवल खर्च बढ़ेगा, बल्कि यह नागरिकों की निजता का उल्लंघन भी हो सकता है। इसको लेकर बुधवार को पार्षद पुष्पेंद्र सिंह जादौन, कुलदीप पांडेय आदि पार्षदों ने नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंप सर्वे का विरोध किया है। वहीं दूसरी ओर व्यापारी नेता मनीष अग्रवाल ने दोबारा सर्वे पर विचार करना चाहिए। दोबारा सर्वे से व्यापारियों पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा, जो ठीक नहीं है।
पहले हुए जीआईएस सर्वे की खामियों को सुधारने के बजाय नया सर्वे कराना जनता पर अतिरिक्त बोझ डालेगा।-कुलदीप पांडेय, पार्षद
अब ड्रोन सर्वे के नाम पर निगम फिर से लाखों रुपये खर्च करने जा रहा है। यह जनता के साथ अन्याय है। पहले पुराने डेटा को ठीक किया जाए।-पुष्पेंद्र सिंह जादौन
ड्रोन सर्वे के नाम पर निगम नागरिकों की निजता का हनन कर सकता है। सर्वे से पहले सभी पार्षदों और नागरिकों से सलाह ली जाए और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए। -संजय पंडित, पार्षद
ड्रोन सर्वे के लिए सभी हित धारकों से सलाह ली जाएगी। नागरिकों की निजता का पूरा ध्यान रखा जाएगा। हमारा लक्ष्य निगम की आय बढ़ाना और शहर के विकास को गति देना है। ड्रोन सर्वे से सटीक डेटा मिलेगा। जिससे वसूली प्रक्रिया में सुधार होगा।-प्रेम प्रकाण मीणा, नगर आयुक्त
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