एएमयू की उर्दू एकेडमी के पूर्व निदेशक डॉ. राहत अबरार ने बताया कि यूनिवर्सिटी में मानद उपाधि मिलने से वह काफी खुश थे। इसके बाद लगातार वह एएमयू आते रहे। उनका यहां से रिश्ता मजबूत होता गया। उधर, पाकिस्तान में प्रो. अब्दुस्सलाम काे अहमदी होने के चलते गैर मुस्लिम करार दे दिया गया। उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जाने लगा। इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान छोड़ दिया और इटली में बस गए। उन्होंने 1996 में इंग्लैंड में आखिरी सांस ली थी।
ये नोबेल पुरस्कार विजेता एएमयू में आ चुके हैं
डॉ. राहत ने बताया कि नोबेल पुरस्कार विजेता सर जॉर्ज एंडरसन, एलेक्जंडर टॉट, सीबी रमन, प्रो. अब्दुस्लाम, तकाकी कजीता यूनिवर्सिटी में आ चुके हैं, जिन्हें यूनिवर्सिटी ने मानद उपाधि भी प्रदान की है।
एएमयू के प्रोफेसर के साथ काम कर रहे नोबेल पुरस्कार विजेता
नवंबर 2016 में एएमयू के 64वें दीक्षांत समारोह में जापान के नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिकी वैज्ञानिक तकाकी कजीता को डॉक्टर ऑफ साइंस की मानद उपाधि दी गई। उनको यह उपाधि न्यूक्लियर फिजिक्स के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए दी गई। इस अवसर पर प्रोफेसर तकाकी कजीता ने कहा था कि उन्हें वर्ष 2008 में एएमयू के भौतिक विभाग के प्रोफेसर सज्जाद अथर के साथ काम करने का अवसर प्राप्त हुआ था, जब प्रोफेसर अथर टोकियो विश्वविद्यालय के कोसमिक रे रिसर्च इंस्टीट्यूट में अध्ययन के संबंध में गए थे। तब से ही वह एएमयू के साथ काम कर रहे हैं।