दिल्ली के अधिवक्ता महमूद प्राचा के अलीगढ़ आने के बाद सीएए-एनआरसी विरोधी गतिविधियां शुरू तो हो गई हैं। मगर सब कुछ अंदरखाने चल रहा है। सोमवार को एक घटनाक्रम के तहत शहर की रहने वाली एएमयू की तीन छात्राओं ने 15 अगस्त से शाहजमाल में धरने का एलान कर दिया। मगर जब यह खबर खुफिया तंत्र व प्रशासन तक पहुंची और इन युवतियों की जांच पड़ताल शुरू हुई तो देर रात इन्होंने इस ऐलान की बात को खारिज करते हुए कह दिया कि कोरोना काल में वह प्रशासन व सरकार के साथ हैं। किसी तरह का धरना प्रदर्शन प्रस्तावित नहीं है। अब आगे जो भी हो, मगर फिलहाल पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
सोमवार शाम को एएमयू की इन तीन छात्राओं ने कुछ मीडियाकर्मियों से इंटरव्यू में यह ऐलान किया कि शाहजमाल में एक बार फिर से धरना शुरू किया जाएगा। वहां टेंट आदि के इंतजाम किए जाएंगे। देर रात यह इंटरव्यू जैसे ही वायरल हुआ तो खुफिया तंत्र व पुलिस प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आई। कुछ अन्य मीडियाकर्मी भी उनके घर तक पहुंच गए। मगर इस बार उन्होंने कह दिया कि वह धरना लगाने के कतई मूड में नहीं हैं। उनका इस तरह का कोई प्लान नहीं है। वह कोरोना काल में प्रशासन व सरकार के साथ हैं। उनके इस पलटवार से सभी हैरान रह गए और प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है।
वहीं, अलीगढ़ की पूर्व मेयर शकुंतला भारती ने इस संबंध में एएमयू वीसी से कहा कि वह छात्राओं को समझाएं। अलीगढ़ विवि को शिक्षा का मंदिर रहने दें। इसके राजनीति का अखाड़ा न बनाएं। इसके पीछे कुछ बड़ी देश विरोधी ताकतें काम कर रही हैं। इधर, जिला प्रशासन और पुलिस अपने-अपने स्तर से इस मामले में जुट गई है। खुफिया पुलिस को अलर्ट किया गया है। एसएसपी मुनिराज जी के मुताबिक कोरोना काल में किसी भी प्रकार के धरना प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। अगर, कोई धरना प्रदर्शन करने का प्रयास करेगा तो उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।