हाथों में तिरंगा और हरे झंडे, जुबां पर नात-ए-नबी की सदाएं, सिर पर सजे साफे और गले में फूलों के हार... ईद मिलादुन्नबी पर शहर में निकले जुलूस-ए-मुहम्मदी में ऐसा ही नजारा देखने को मिला। पुराने शहर से लेकर नए इलाकों तक निकले जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। बालिकाओं और बच्चों की मौजूदगी ने भी ध्यान खींचा। रास्ते भर नात-ए-नबी की सदाएं गूंजती रहीं और लोग मोहब्बत, भाईचारे व इंसानियत का संदेश देते नजर आए।
सिविल लाइंस क्षेत्र में करीब 35 स्थानों से जुलूस-ए-मुहम्मदी निकाले गए। अलग-अलग क्षेत्रों से निकले जुलूस केला नगर पहुंचे। यहां से मदरसा फैजान मुस्तफा के प्रबंधक अल्लामा मौलाना सैयद जमाल अहमद की अगुवाई में जुलूस आगे बढ़ा। केला नगर, दोधपुर और मेडिकल कॉलेज रोड होते हुए जुलूस निजामी पुलिया पहुंचा और इसके बाद जोहरा बाग स्थित मदरसा फैजान मुस्तफा पर जाकर समाप्त हुआ। मेडिकल कॉलेज रोड से करीब 65 मिनट तक जुलूस गुजरा।
मौलाना सैयद जमाल अहमद ने कहा कि रसूल की मोहब्बत ईमान की जान है। पैगंबर की सीरत पूरी मानवता को मोहब्बत, इंसानियत, नैतिकता और बेहतर जीवन जीने का संदेश देती है। एएमयू, भुजपुरा, ऊपरकोट, शाहजमाल ईदगाह समेत अन्य इलाकों से भी जुलूस निकाले गए।
मुस्तफा जामा मस्जिद में मोए मुबारक की जियारत
जुलूस के समापन के बाद मुस्तफा जामा मस्जिद, जोहराबाग में मोए मुबारक की जियारत कराई गई। देर रात तक बड़ी संख्या में अकीदतमंद जियारत के लिए पहुंचे और दुआएं मांगीं।
खानकाह नियाजिया से भी निकला जुलूस
खानकाह नियाजिया अलनियाज एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी की ओर से पीर-ए-तरीकत डॉ. मोहम्मद अब्बास नियाजी की अगुवाई में जुलूस निकाला गया। यह सैयद कॉलोनी, तैयब कॉलोनी, नगला मल्लाह, गोल्डन वाली गली, दूधपुर, मेडिकल रोड और जकरिया मार्केट होते हुए खानकाह नियाजिया पहुंचा। डॉ. मोहम्मद अब्बास नियाजी ने कहा कि यह केवल खुशी मनाने का अवसर नहीं, बल्कि पैगंबर-ए-अकरम के आदर्शों को याद करने और उन्हें जीवन में उतारने का मौका है।
अधूरी सड़कें और खुले गड्ढों ने खोली व्यवस्था की पोल
जुलूस के दौरान मेडिकल रोड समेत कई स्थानों पर अधूरी सड़क और खुले गड्ढे परेशानी का कारण बने। जुलूस के मार्ग में मौजूद गड्ढों और सड़क की बदहाली से लोगों को आवागमन में दिक्कत हुई। इससे नगर निगम की तैयारियों और व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठे।