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जीवन हाॅस्पिटल में कन्या भ्रूण की जांच पर छापा, मशीनें सील

Tue, 17 Oct 2017 02:36 AM IST
अमर उजाला, अलीगढ़
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थाने में एसीएम के समक्ष विधायक संजीव राजा एवं अनिल पाराशर को घटना की जानकारी देते डॉ जयंत शर्मा। - फोटो : अमर उजाला
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महानगर के विष्णुपुरी बेलामार्ग स्थित जीवन हास्पिटल पर राजस्थान के जयपुर से आई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोमवार शाम अचानक छापा मारा। यहां कन्या भ्रूण की जांच करने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। टीम के सदस्यों ने बताया कि उस कन्या भ्रूण की कोख में ही हत्या करने को भी अस्पताल का स्टाफ राजी हो गया था, जिसके लिए मोटी रकम मांगी गई थी। इस दौरान अस्पताल के स्टाफ, अस्पताल संचालक डा. जयंत शर्मा और उनकी पत्नी डा. दिव्या चौधरी के साथ टीम के सदस्यों की खूब कहासुनी हुई। 
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टीम के सदस्यों में शामिल अलीगढ़ के अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. पीके शर्मा ने बताया कि जयपुर से स्वास्थ्य विभाग की टीम सोमवार शाम जीवन हास्पिटल पहुंची। इससे पहले टीम ने जिलाधिकारी ऋषिकेश भास्कर याशोद को पूरी जानकारी दी थी। डीएम के निर्देश पर अपर नगर मजिस्ट्रेट राम सूरत पांडेय, सीओ थर्ड संजीव दीक्षित और पुलिस फोर्स भी टीम के साथ हो गई। टीम ने पहले अस्पताल में एक दंपति को भेजा। डाक्टरों ने गर्भवती महिला के गर्भ की जांच करने के बाद बताया कि उसके गर्भ में कन्या है। दंपति ने गर्भपात करने की बात कही। अस्पताल स्टाफ गर्भपात करने को राजी हो गया। जिसके लिए मोटी रकम मांगी गई। 

इसी दौरान टीम ने छापा मार दिया। रेडियोलाजी विभाग की यूनिट को सील कर दिया गया। दूसरी जांच मशीनें भी सील की र्गइं।  अस्पताल संचालक डा. जयंत शर्मा और डा. दिव्या चौधरी ने विरोध जताया तो पुलिस उनको साथ लेकर थाना क्वार्सी पहुंची। थाने में आईएमए के पदाधिकारी और दूसरे कई डाक्टर पहुंचे। देर रात तक पुलिस डॉक्टर और राजस्थान की टीम के बीच वार्ता हो रही थी। 
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बता दें कि अलीगढ़ में जीवन हास्पिटल में ही टेस्ट ट्यूब बेबी पैदा करने की शुुरुआत हुई और सरोगेसी के केस भी यहां पर सफलतापूर्वक किए गए हैं। डाक्टर दंपति का दावा है कि अलीगढ़ मंडल में टेस्ट ट्यूब बेबी और सरोगेसी की शुरुआत उन्होंने ही की है। 

मैं अलीगढ़ मेयर पद का चुनाव लड़ना चाहता था। दावेदारी कर रहा था। इसीलिए विरोधियों ने साजिश कर मेरे हास्पिटल को निशाना बनवाया है। रेडियोलॉजी विभाग में घुसकर कीमती मशीनें तोड़ी गई हैं। कन्या भ्रूण की जांच का कोई मामला नहीं है। कुछ दिन पहले भी ऐसे ही लोग आए थे, तब भी ऐसी कहानी रचने की कोशिश की थी, इसके साक्ष्य मौजूद हैं। मुझे और मेरी पत्नी को बदनाम करने की साजिश है। -डा. जयंत शर्मा, संचालक जीवन हास्पिटल 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कन्या भ्रूण लिंग की जांच करने वाले डाक्टर या नर्सिंग होम संचालक की जानकारी देने पर एक लाख रुपये का ईनाम तय कर रखा है, लेकिन आज

तक जिले में ऐसी एक भी सूचना किसी ने नहीं दी है। कन्या भ्रूण की हत्या करना, उसकी जांच करना दोनों कानूनी अपराध हैं। इस पर बेहद सख्त कार्रवाई होती है। जीवन हास्पिटल के मामले की जांच चल रही है। - डा. एमएल अग्रवाल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

जीवन हास्पिटल की घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। एकतरफा कार्रवाई की सूरत में सभी प्राइवेट डाक्टर्स ओपीडी बंद कर देंगे। पूरी टीम क्वार्सी थाने में डा. जयंत के साथ है। 
-डा. प्रदीप बंसल, आईएमए के मीडिया प्रभारी

कन्या भ्रूण लिंग की जांच करना संज्ञेय अपराध है। ऐसा होने पर नर्सिंग होम का लाइसेंस निरस्त हो सकता है। जीवन हास्पिटल में जयपुर से आई टीम ने जांच की है। बाकी तथ्य सामने आने पर ठोस बात कही जा सकती है। -डा. गीता प्रधान, सीएमएस मोहन लाल गौतम महिला चिकित्सालय

राजस्थान से आई टीम ने अपने आला अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों की राय ली। उन्होंने पाया कि इस मुकदमे में सात साल से कम की सजा का प्रावधान है। इसलिए गिरफ्तारी नहीं की जा रही है। हॉस्पिटल रेडियो लॉजी यूनिट पर लगी सील जारी रहेगी। फिलहाल डॉक्टर दंपति को छोड़ दिया गया है। राजस्थान की टीम अभी अलीगढ़ में ही रुकी हुई है। जांच जारी है।  - अतुल श्रीवास्तव, एसपी सिटी

राजस्थान की टीम और विधायकों के बीच घंटों चली कशमकश
जीवन हास्पिटल में कन्या भ्रूण की जांच के खुलासे के हाईप्रोफाइल प्रकरण में देर रात तक डाक्टर पक्ष और मौके पर भ्रूण लिंग परीक्षण का खुलासा करने वाली राजस्थान की स्वास्थ्य विभाग की टीम के बीच रस्साकसी होती रही। दोनों ओर से मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर दी गई, लेकिन रात साढ़े बारह बजे तक तस्वीर साफ नहीं हुई थी। 
प्रशासनिक टीम डा. जयंत शर्मा और उनकी पत्नी डा. दिव्या चौधरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और उनको राजस्थान की टीम के सुपुर्द करने पर अड़ी रही। डाक्टर पक्ष से जुटे शहर विधायक संजीव राजा, कोल विधायक अनिल पाराशर और डाक्टरों की लॉबी इस तरह के आरोप में थाने में मुकदमा दर्ज नहीं कराने और नियमानुसार कार्रवाई पर अड़े रहे। राजस्थान की टीम का कहना था कि वह सोनोग्राफी करते हुए रंगेहाथ पकड़ी गई डा. दिव्या चौधरी को साथ लेकर जाएगी। 
वहीं दोनों विधायकों का कहना था कि यूपी में इस तरह के मामले में मौके से गिरफ्तारी करने का प्रावधान ही नहीं है। इसलिए उन्हें न ले जाया जाए। डाक्टर दंपति का पक्ष ले रहे कुछ लोगों की मीडियाकर्मियों से भी कहासुनी हुई। देर रात तक थाने में डा. प्रदीप बंसल और व्यापारी नेता शमन माहेश्वरी आदि डटे थे। 
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