अपहरण के बाद बेरहमी से कत्ल कर दिए गए रामबाग कॉलोनी निवासी योगेश के परिजनों का दुख बांटना तो दूर की बात उनकी बात तक नहीं सुनी जा रही है। जिले के प्रभारी प्रमुख सचिव समाज कल्याण सुनील कुमार के आने की सूचना मिलने पर शुक्रवार को परिजन उनसे अपना दर्द बयां करने और मुआवजा मांगने कलक्ट्रेट गये थे। कलक्ट्रेट पहुंचे तो गेट पर ही पुलिसकर्मियों ने रोक दिया। सूचना मिलते ही एडीएम सिटी मौके पर पहुंचे और कलक्ट्रेट के मुख्य द्वार से सभी बाहर करना शुरू कर दिया। बमुश्किल कुछ महिलाओं को गेट पर ठहरने दिया। हूज्जत हुई तो पुलिस के साथ महिला पुलिस बुला ली गई और पीड़ित परिवार के साथ आई महिलाओं को लाठी दिखा कर गेट से बाहर कर दिया गया।
इतना सब झेलने के बाद पीड़ित परिजनों के साथ आए हिंदुवादी संगठन जब अड़ गये तो प्रशासन का रूख कुछ नरम पड़ा। इसके बाद योगेश की बहन और कुछ अन्य परिजनों को प्रमुख सचिव से मिलवाया गया। योगेश की बहन ने प्रमुख सचिव को पूरा मामला बताया कि क्वार्सी थाने की पुलिस की लापरवाही से उसके भाई का अपहरण हुआ और बाद में हत्या कर दी गई। बदमाशों ने 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। प्रमुख सचिव ने इस मामले में बहन से प्रार्थना पत्र लेकर उचित कार्रवाई और सरकार से नियमानुसार मुआवजा दिलवाने का भरोसा दिया है। मृतक के परिजनों ने 20 लाख रुपया मुआवजा एवं मृतक की बहन को सरकारी नौकरी दिये जाने की मांग की। प्रमुख सचिव ने इसे डीएम स्तर का मामला बताते हुए समाज कल्याण अधिकारी को कार्रवाई करने को कहा।
इस बीच मुआवजे की मांग को लेकर परिवार वालों ने भाजपा नेताओं के साथ कलक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन किया। साथ ही हत्यारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी मांग की है। गौर हो कि इस प्रकरण में दो लोगों को जेल भेजने जबकि दो अभी तक फरार हैं। हिंदू जागरण मंच बृज प्रांत के महानगर अध्यक्ष अमित राजा के नेतृत्व में अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा गया। गौर हो कि क्वार्सी इलाके की रामबाग कालोनी में गली नंबर एक से 50 लाख की फिरौती के लिए योगेश पुत्र स्वर्गीय खूबी राम का एक महीने पहले अपहरण कर लिया गया था। अपहरणकर्ताओं ने उसकी हत्या कर शव हाथरस जंक्शन में रेलवे ट्रैक पर 30 अप्रैल को ही फेंक दिया था और जीआरपी ने उसका अज्ञात शव में अंतिम संस्कार करा दिया था। मामले का खुलासा दो लोगों को हिरासत में लेने के बाद 26 मई को हुआ है।
पुलिस पर लापरवाही का आरोप
हिंदू जागरण मंच-बृज प्रांत के अमित राजा ने जिलाधिकारी को दिए ज्ञापन में कहा है कि योगेश के मामले में पुलिस ने लापरवाही बरती है। जब 27 अप्रैल को 50 लाख की फिरौती के लिए फोन आया था तो उसकी जानकारी पुलिस को दी गई थी। लेकिन इसको गंभीरता से नहीं लिया गया। 30 अप्रैल को उसकी हत्या कर दी गई। मृतक घर का एक मात्र अजीविका हासिल करने वाला सदस्य था। घर में अब विधवा मां और दो बहनें रह गई हैं। इस प्रकरण में पुलिस की भूमिका की जांच हो।