महामारी के खिलाफ संघर्ष करते हुए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज ने एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाने की पहल की है। मेडिकल कॉलेज में अब कोविड 19 की वैक्सीन बनाने की दिशा में काम करना शुरू किया है। इसके लिए प्रारंभिक रूप से सभी औपचारिकताएं पूरी करके संबंधित मंत्रालयों और संस्थाओं को भेजा गया है।
एएमयू के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर कहते हैं वैक्सीन बनाने के लिए जो भी औपचारिकताएं होती हैं उसके लिए इंडियन मेडिकल काउंसिल फॉर रिसर्च, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन व अन्य ऐसी ही संस्थाओं के लिए औपचारिकताएं पूरी कर अनुमति के लिए भेजी गई हैं।
वैक्सीन बनाने की दिशा में सबसे बड़ा चरण उस समय आता है जब वैक्सीन बनने के बाद उसका क्लिनिकल ट्रायल किया जाता है। यह एक महत्वपूर्ण फेस होता है। जेएन मेडिकल कॉलेज लगातार इस दिशा में भी काम कर रहा है। हमें पूरी उम्मीद है हम प्लाज्मा थेरेपी के बाद इस दिशा में भी महत्वपूर्ण मुकाम हासिल करेंगे। एएमयू के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर स्वयं भी एक वरिष्ठ सर्जन हैं और मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल भी रह चुके हैं।
कोरना के खिलाफ लड़ाई में मेडिकल कॉलेज द्वारा अब तक उठाए गए कुछ प्रमुख कदम
- जेएन मेडिकल कॉलेज का वायरोलोजी लैब महामारी के प्रारंभ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का पहला लैब था जहां कोविड के नमूनों की जांच शुरू हुई।
- कोविड-19 नमूनों की तेजी से जांच के लिए दो नई अत्याधुनिक मशीनें खरीदी गई।
- 200 से अधिक की बेड क्षमता वाले आइसोलेशन वार्ड और कोविड-19 वार्ड का निर्माण किया गया।
- प्लाज्मा थेरेपी की शुरुआत की गई और प्लाज्मा बैंक स्थापित किया गया इसके लिए आवश्यक उपकरण भी जुटा लिए गए।
- अब तक 70000 से अधिक कोविड-19 नमूनों की जांच की गई।
- अब तक 100 से अधिक मरीज स्वस्थ होकर अपने-अपने घर जा चुके हैं।