तीनों किस्मों की खासियत
1. कुफरी नीलकंठ : इस किस्म में शर्करा और स्टार्च का स्तर अपेक्षाकृत कम होता है। इसमें एंथोसायनिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग बढ़ रही है।
2. कुफरी सूर्या : सीपीआरआई के अनुसार इस किस्म की संरचना सामान्य आलू से अलग है। इसे बेहतर पोषण और संतुलित शर्करा प्रभाव वाली किस्मों में शामिल किया जाता है। किसानों को इसकी उपज भी अच्छी मिल रही है।
3. चिप्सोना-1 : इसमें शुष्क पदार्थ (ड्राई मैटर) अधिक और शर्करा कम होती है। यही कारण है कि चिप्स और प्रोसेस्ड उत्पाद बनाने वाली कंपनियां इसे प्राथमिकता देती हैं। इससे तैयार उत्पाद का रंग और गुणवत्ता बेहतर रहती है।
इन किस्मों का ग्लाइसेमिक प्रभाव सामान्य आलू की तुलना में कम है, इसलिए इन्हें मधुमेह रोगियों के लिए अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माना जा रहा है। अधिक पौष्टिक, रोग प्रतिरोधी और बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल नई किस्मों पर काम किया जा रहा है। -आरएल प्रसाद, उप निदेशक, राज्य बीज प्रमाणन संस्थान
प्रदेश की आलू बेल्ट में नई किस्मों की पैदावार काफी चर्चित हो रही है। इसका बड़ा लाभ आलू के रकबा में वृद्धि होना है। -सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी, अलीगढ़
कुफरी नीलकंठ की एनसीआर और दिल्ली में मांग बढ़ रही है। किसानों में अभी इसके प्रति जागरूकता कम है, जबकि बेहतर कीमत मिल सकती है। इस रबी सीजन में कुफरी सूर्या की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी रही। - जितेंद्र अवस्थी, आलू निर्यातक