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आलू चिप्सोना : शुगर 50-50

Wed, 21 Mar 2018 01:44 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
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सब्जियों के राजा आलू के मामले में तरह-तरह की भ्रांतियां हैं। शुगर के मरीजों के लिए आलू खाना जहर के समान माना जाता है। चिकित्सक भी मरीज को आलू से दूर रहने की सलाह देते हैं तो वजन बढ़ाने में आलू मुख्य आहार माना जाता है। विशेषज्ञों की राय में जमीन से निकला आलू शुगर फ्री ही होता है, लेकिन कुछ ही समय बाद इसमें कार्बोहाइड्रेट से स्टार्च में बदलने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। परिणामस्वरूप आलू शुगर युक्त हो जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो आलू में शुगर की मात्रा करीब 50-50 प्रतिशत होती है। 
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जिला उद्यान अधिकारी एनके सहानियां ने बताया कि आलू में चिप्सोना वैरायटी को सबसे कम शुगर वाला आलू माना जाता है। चिप्सोना-1, चिप्सोना-3, चिप्सोना-4 एवं फ्राई सोना आलू की उन्नत नस्लें हैं। प्रोसेस वैरायटी माने जाने वाले इस आलू में सीआईपीसी दवा का छिड़काव रामबाण साबित होता है। इस दवा के छिड़काव के कारण आलू में कार्बोहाइड्रेट से स्टार्च में तब्दील होने की प्रक्रिया लगभग रुक जाती है। इस वजह से इस आलू को शुगर फ्री आलू की श्रेणी में रखा जाता है। 

आलू को शुगर फ्री बनाने की अन्य विधियां 
निवर्तमान जिला अभिहित अधिकारी चंदन पांडेय ने बताया कि आमतौर पर तो आलू में शुगर होती ही है। हर किस्म में इसकी मात्रा कम या ज्यादा होती है, लेकिन इसे प्रोसेसिंग से शुगर फ्री बनाया जाता है। आलू में कार्बा मिट डोजिंग का छिड़काव कर इसे शुगर फ्री करते हैं। कोल्ड स्टोरेज स्वामी चिप्सोना समेत अन्य उन्नत किस्म के आलू में शुगर की मात्रा बढ़ने से रोकने के लिए इसका प्रयोग करते हैं। कोल्ड का तापमान भी दस डिग्री के आसपास रखना होता है। इससे ज्यादा तापमान पर स्टार्च निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना रहती है। 
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छिलका निकालकर उबालने से कम होता है स्टार्च 
खाद्य प्रसंस्करण अधिकारी बलवीर सिंह ने बताया कि यह भ्रांति है कि आलू को उबालने से उसमें शुगर की मात्रा कम हो जाती है। लेकिन यदि आलू का छिलका हटाकर उसे उबाला जाय तो स्टार्च व कार्बोहाइड्रेट की मात्रा जरूर कम हो जाती है। चिप्स को इसी प्रोसेस से बनाया जाता है। इसके रूप में आलू का सेवन नुकसानदायक नहीं होता। 

विशेषज्ञों की राय 
कृषि विज्ञान केंद्र छेरत के वैज्ञानिक सुधीर सारस्वत ने बताया कि शिमला के कुफरी में आलू की प्रजाति चिप्सोना विकसित की गई है। इसमें कार्बोहायड्रेट की मात्रा बहुत कम होती है, जिससे शुगर की मात्रा स्वत: ही कम हो जाती है। इसमें लगभग 4 से 5 फीसदी तक ही शुगर बचता है। इसकी पहचान भी मुश्किल नहीं है। ये देखने में साफ मटमैले रंग का होता है, इसका छिलका बहुत पतला होगा। ये ज्यादा बड़ा और न ज्यादा छोटा होता है। इसका साइज मीडियम होता है। इसकी सतह बिल्कुल चिकनी होती है। अलीगढ़ में लगभग 800 से एक हजार हेक्टेयर कृषि भूमि में इसकी पैदावार हो रही है। दूसरे साधारण आलू से इसकी कीमत लगभग तीन से पांच रुपये किलो तक ज्यादा होती है। इगलास में कई किसान इसकी पैदावार कर सीधे चिप्स बनाने वाली बड़ी कंपनियों को दे रहे हैं। इससे उनकी कमाई भी बढ़ी है। 

शुगर फ्री आलू बना ठगी का धंधा
देश में बढ़ रहे शुगर के मरीजों के चलते शुगर फ्री आलू का धंधा तेजी से फल फूल रहा है। शुगर फ्री के नाम पर दुकानदार न केवल ग्राहक को चार पांच रुपये अधिक कीमत पर आलू बेच रहे हैं, बल्कि उसकी अज्ञानता का फायदा उठाकर किसी भी किस्म का आलू उसे बेच रहे हैं। ग्राहक भी उसे शुगर फ्री के नाम पर खा रहा है। 
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