पहली बार खैर में हो रहे उपचुनाव में सपा फिर से ताकत झोंक रही है। 31 साल से पार्टी को यहां जीत की दरकार है। बसपा 22 साल से यहां जीत का इंतजार कर रही है।
खैर विधानसभा क्षेत्र में कभी समाजवादी पार्टी अपना खाता नहीं खोल सकी है। इस विधानसभा क्षेत्र से पार्टी ने प्रत्याशी तो हर विधानसभा चुनाव में उतारे, लेकिन 'साइकिल' से कोई विधानसभा तक नहीं पहुंच सका। पहली बार यहां हो रहे उपचुनाव में सपा फिर से ताकत झोंक रही है। 31 साल से पार्टी को यहां जीत की दरकार है।
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यही हालात बहुजन समाज पार्टी के भी हैं। बसपा 22 साल से यहां जीत का इंतजार कर रही है। बसपा ने एक बार वर्ष 2002 में यह सीट जीती थी, उस वक्त बसपा प्रत्याशी प्रमोद गौड़ ने जीत दर्ज की थी। हर चुनाव में पार्टी ने जीत का दावा किया, लेकिन नाकामी ही मिली। गौर हो कि इसी विधानसभा क्षेत्र से चुनकर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की बेटी ज्ञानवती विधानसभा जा चुकी हैं। वह भाजपा से चुनाव लड़ी थीं।
खैर विधानसभा उप चुनाव में पार्टी मजूबती से चुनाव लड़ रही है। उसे कांग्रेस का भी साथ मिल रहा है। -लक्ष्मी धनगर, जिलाध्यक्ष, सपा
वर्ष 2022 में हुए खैर विधानसभा चुनाव में पार्टी दूसरे स्थान पर थी। इस बार पार्टी की जीत निश्चित है।-मोरध्वज कुशवाहा, जिलाध्यक्ष, बसपा
पहले संयुक्त, फिर टप्पल और अब खैर विधानसभा क्षेत्र
-1952 में टप्पल, खैर, चंडौस, जवां संयुक्त विधानसभा क्षेत्र
-1957 में टप्पल क्षेत्र बना
-1967 में खैर विधानसभा क्षेत्र बना