एक मुकदमा वर्ष 2000 का सिविल लाइंस का रात में लूट का है। जिसमें सिर्फ वादी रिक्शा पोलर गवाही के लिए आया। लूट के कुछ देर बाद ही आरोपी पुलिस ने चाकू सहित पकड़ा। उसका अलग से मुकदमा लिखा गया। उसमें भी कोई गवाह नहीं आया। दोनों मामलों में पुलिस को गवाही व साक्ष्य पेशी के लिए पर्याप्त अवसर दिए जाने के बाद भी किसी के न आने पर इसी वर्ष 29 जनवरी को अवसर समाप्त कर दिया गया। इसी तरह तीसरा मुकदमा 2004 का है, जिसमें पुलिस ने आरोपी तमंचे सहित पकड़ा। उसमें भी आज तक कोई गवाह न आने पर 28 जनवरी को इसी वर्ष गवाही का अवसर समाप्त किया गया। तीनों में आरोपी बरी कर दिए गए।
ये तथ्य भी जानें
- 600 गिरफ्तारी शस्त्र अधिनियम में 2024 में हुईं
- 165 गिरफ्तारी शस्त्र अधिनियम में 2025 में मार्च तक