अलीगढ़ (ब्यूरो)। यूपी पुलिस में धोखाधड़ी पर एक युवक लिपिक संवर्ग में भर्ती हो गया। पिछले 18 साल से वह सेवाएं दे रहा था। हालांकि शुरुआती दौर में उसके फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया था मगर अदालती अड़चनों के चलते वह लंबे समय तक नौकरी में बना रहा। पिछले दिनों जांच में जब उसे दोषी पाया गया तो उसे निलंबित कर दिया गया और सोमवार को एसएसपी ने उसे महकमे से बर्खास्त कर दिया।
घटनाक्रम कुछ इस तरह से है कि मूलरूप से खुर्जा निवासी नीरज राघव के पिता यूपी पुलिस में तैनात थे। अरसे पहले उनकी सेवाकाल के दौरान मौत हो गई और नीरज के बड़े भाई को मृतक आश्रित के तौर पर यूपी पुलिस में नौकरी मिल गई। इसके बाद अचानक अपने भाई को नौकरी मिलने संबंधी तथ्यों को छिपाते हुए नीरज राघव ने मृतक आश्रित के रूप में खुद का दावा ठोक दिया और 1997 में नैनीताल (पूर्व में यूपी का जिला/अब उत्तराखंड) में कांस्टेबिल लिपिक के पद पर नौकरी पा ली।
नैनीताल में नौकरी पाने के कुछ समय बाद ही उसका फर्जीवाड़ा खुला और नीरज राघव पर वहां धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ मगर वह हाईकोर्ट चला गया। खुद की नौकरी को कायम रखते हुए राज्य अलग होने पर यूपी के मथुरा जनपद में तैनाती पा ली। कुछ अंतराल के बाद उसकी एएसआई लिपिक संवर्ग के पद पर पदोन्नति भी हो गई।
पिछले कुछ समय से वह ट्रांसफर के बाद अलीगढ़ जनपद में तैनात था। पिछले दिनों जब यूपी में फर्जीवाड़े के तहत नौकरी पाने वालों की जांच हुई तो नीरज राघव भी जांच की जद में आया। उसे निलंबित कर दिया गया।
निलंबन काल में वह पिछले कुछ समय से गैरहाजिर चल रहा था। कई बार के नोटिसों के बाद में वह अपना पक्ष रखने नहीं आया और जांच में उसकी नौकरी फर्जी तरीके से पाया जाना सिद्ध हो गया। इस आधार पर एसएसपी जे रविन्दर गौड़ ने सोमवार को उसे पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया।