इससे पहले विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना था कि यूनिवर्सिटी छात्रों की और संपत्ति की सुरक्षा के लिए कैंपस में पुलिस को कॉल करना पड़ा था। इसके पीछे तर्क दिया गया कि पहले भी असामाजिक तत्वों ने प्रदर्शन की आड़ में कुलपति लॉज को जलाया था। कैंपस में तोड़फोड़ हुई थी।
विगत में हुई घटनाओं को देखते हुए पुलिस को बुलाने का फैसला छात्रों और विश्वविद्यालय के हित में लिया गया। लेकिन मंगलवार को विश्वविद्यालय प्रशासन ने अचानक यू टर्न ले लिया और अब पुलिस के खिलाफ हास्टल में घुसने व छात्रों के साथ मारपीट करने पर रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही है।
15 दिसंबर की रात हुए बवाल के बाद बाब-ए-सैयद से लेकर वीसी लॉज तक रोड क्लीयर करने के लिए पुलिस को बुलाया गया था। हॉस्टल में घुसकर छात्रों को मारपीट कर घायल करने के लिए नहीं बुलाया गया था।
पुलिस मोरिसन कोर्ट हॉस्टल, आफताब हॉल में घुसी, आगजनी, तोड़फोड़ हुई और छात्रों को मारपीट कर घायल किया। इसके चलते अब विश्वविद्यालय पुलिस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है’- प्रो. शाफे, किदवई, एमआईसी, एएमयू