सार्वजनिक रूप से शराब पीकर असहज स्थिति पैदा करने वालों के खिलाफ समय-समय पर चलाए जाने वाला पुलिस का अभियान कई परिवारों के लिए वरदान साबित हुआ है। सामाजिक संस्था के अध्ययन में यह पता चला है कि कुछ वर्ष पहले चले इस अभियान में पकड़कर उनको शर्मसार किए जाने के बाद कुछ लोगों ने शराब से हमेशा के लिए तौबा कर ली।
इससे उन व्यक्तियों के परिवारों में एक अच्छा बदलाव आया है और परिवारों में भी खुशी है। सामान्यत: यह देखने में आया है कि इन अभियानों को बेहद हल्के में लिया जाता है। मगर इस तरह के परिणामों से पुलिस भी बेहद उत्साहित है।
अब महकमा इस बात को लेकर विचार कर रहा है कि पकड़े जाने के समय ही कुछ मनोवैज्ञानिकों से मौके पर ही ऐसे लोगों की काउंसिलंग करा दी जाए।
सामाजिक संस्था उड़ान के अध्यक्ष और वरिष्ठ समाजशास्त्री डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा कहते हैं कि उनकी संस्था नशाखोरी से पीड़ित परिवारों के संबंध में अध्ययन कर रही थी।
इस दौरान यह तथ्य सामने आया कि कुछ वर्ष पहले पुलिस द्वारा शराबियों के खिलाफ चलाए गए अभियानों में कुछ लोग पकड़े गए। इन्हें थाने लाया गया था और परिजन या उनके मोहल्ले के किसी सम्मानीय व्यक्ति की सुपुर्दगी में हिदायत के साथ सौंपा गया। साथ ही उन्हें शर्मसार भी किया गया।
इनमें से कुछ लोगों ने शराब से हमेशा के लिए तौबा कर ली थी। डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा कहते हैं कि सामाजिक कारणों से इनके नाम तो सार्वजनिक नहीं किए जा सकते, लेकिन इनमें सराय हकीम, घुड़ियाबाग, मसूदाबाद चौराहे पर रहने वाले लोग हैं।