साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930, जनपदीय साइबर सेल के सीयूजी नंबर 7839876377 व 7839876352 पर संपर्क करने और www.cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करांए।
पुलिस किसी को भी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती, यह काम साइबर अपराधियों का है। अगर साइबर अपराध के बारे में किसी व्यक्ति से पूछताछ करनी है, तो पुलिस उसे थाने या पुलिस अधिकारी कार्यालय बुलाती है।
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ये बातें आईपीएस प्रशिक्षु सम्यक चौधरी ने 17 जनवरी को सर सैयद नगर स्थित एमयू कॉलेज में आयोजित अमर उजाला की पुलिस की पाठशाला में कहीं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अगर वह जागरूक हैं तो साइबर ठगी से बच जाएंगे। मोबाइल पर आने वाली अनजान कॉल, वह चाहे वॉयस या वीडियो कॉल हो उसे रिसीव करने से परहेज करें। किसी लुभावने उपहार के लालच में बिल्कुल न आएं।
उन्होंने नकली पुलिस अधिकारी बनकर कॉल करने और तथाकथित डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने-धमकाने की घटनाओं के बारे में आगाह किया। सम्यक चौधरी ने कहा कि पुलिस का हमदर्द समझें। उनकी मदद करें। विद्यार्थियों ने पुलिसिंग और यूपीएससी के बारे भी सवाल भी किए, जिनका जवाब आईपीएस प्रशिक्षु ने दिए।
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साइबर थाना के उप निरीक्षक अमित कुमार ने बताया कि साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930, जनपदीय साइबर सेल के सीयूजी नंबर 7839876377 व 7839876352 पर संपर्क करने और www.cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करांए। स्कूल के प्रधानाचार्य सैयद मोहम्मद हैदर नकवी ने आभार जताया।
क्या करें-क्या न करें
साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर दें।
अपनी व्यक्तिगत तस्वीरें सार्वजनिक रूप से साझा न करें।
ब्राउजर में सोशल मीडिया अकाउंट में लॉग इन करते वक्त लॉग इन या रिमाइंडर मी को चेक न करें।
अपनी जन्मतिथि, नाम, मोबाइल नंबर आदि का इस्तेमाल कभी पासवर्ड में न करें। किसी भी पॉपअप विज्ञापन पर गौर न करें।