जिला पुलिस की साइबर सेल से आए साइबर एक्सपर्ट विपिन कुमार ने बताया कि समझदारी और होशियारी से ही साइबर ठग से बच सकते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनजान लाइक को अपना समर्थन बिल्कुल न दें। अनजान नंबर से आने वाले वीडियो कॉल भी नहीं उठाने चाहिए। साइबर ठग खुद को पुलिस बताकर उन लोगों का डिजिटल अरेस्ट कर रहे हैं, जो उनकी धमकियों से डर जाते हैं। इसलिए स्वयं जागरूक होना जरूरी है। पुलिस किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है।
उन्होंने बताया कि फेसबुक पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट को स्वीकार नहीं करना चाहिए। ईमेल अटैचमेंट के जरिये किसी सॉफ्टवेयर को डाउनलोड न करें। क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड की जानकारी वेब ब्राउजर में जमा न करें। ओटीपी किसी के साथ शेयर न करें। साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर दें। साथ में व्हाट्सएप में टू स्टेप को अपनाकर अपना डाटा सुरक्षित रखने, ऑनलाइन एकाउंट को हमेशा लॉग आउट रखने, मुफ्त उपहार, प्रस्ताव, संदेश, मेल आदि पर विश्वास न करने संबंधी टिप्स भी दिए।
क्या न करें
- अपनी व्यक्तिगत तस्वीरें सार्वजनिक रूप से साझा न करें।
- ब्राउजर में सोशल मीडिया अकाउंट में लॉग इन करते वक्त लॉग इन या रिमाइंडर मी को चेक न करें।
- अपनी जन्मतिथि, नाम, मोबाइल नंबर आदि का इस्तेमाल कभी पासवर्ड में न करें।
- किसी भी पॉपअप विज्ञापन पर गौर न करें।
इस तरह के आयोजन किशोर उम्र बच्चों के लिए जागरूकता के साथ-साथ कॅरियर संबंधी रास्ता दिखाने वाले होते हैं। बच्चे अभिभावक-शिक्षक से तो रोज मिलते हैं। मगर ऐसे आयोजनों में वक्ता नए तथ्य देकर जाते हैं। बच्चों से यही अपील है कि यहां से कुछ न कुछ लेकर जाएं।-मयंक पाठक, एएसपी