अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र नेता एवं बरौली विधायक ठाकुर दलवीर सिंह के पौत्र ठाकुर अजय सिंह को पुलिस अधिकारियों ने उनके घर में ही नजरबंद कर दिया। चंदन को श्रद्धांजलि देने के लिए उन्हेें एवं उनके साथियों को एएमयू में जाने से जबरन रोक दिया गया। एएमयू प्रशासन द्वारा कैंपस में 10 दिनों तक जुलूस एवं प्रदर्शन आदि पर रोक लगा दी गई है।
कासगंज सांप्रदायिक दंगा के शिकार हुए चंदन को श्रद्धांजलि देने के लिए एएमयू के छात्र नेता ठाकुर अजय सिंह एवं विक्रांत जौहरी आदि कैंपस में एकता मार्च निकालने वाले थे। बुधवार को इसकी घोषणा के साथ ही कैंपस में चर्चा का बाजार गरम था। चार बजे अजय सिंह मार्च निकालने वाले थे। जबकि छह बजे अन्य मुद्दों को लेकर एएमयू छात्र संघ द्वारा भी एक मार्च निकालने की घोषणा की गई थी। एलआईयू रिपोर्ट के बाद गुरुवार को अवंतिका फेज वन स्थित अपने घर में जब अजय सिंह सोए थे, उसी समय सीओ संजीव दीक्षित, एसीएम रामसूरत पांडेय एवं एसओ क्वार्सी अमित यादव पुलिस-फोर्स के साथ उनके घर पर पहुंच गए।
सुबह नौ बजे जब अजय सिंह सोकर उठे तो उनके पूरे घर को पुलिसकर्मी घेरे हुए थे। पुलिस अधिकारियों ने दिन भर अजय सिंह को उनके घर में नजरबंद रखा। शाम में अजय सिंह ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अधिकारियों को दिया, जिसमें 26 जनवरी को तिरंगा यात्रा के दौरान सांप्रदायिक दंगे के शिकार चंदन के परिजनों को एक करोड़ रुपये, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, दंगा में घायल अकरम को 50 लाख रुपये देने की मांग की गई है।
ठा. अजय सिंह ने कहा कि मै हमेशा एएमयू के लिए खड़ा रहा, लेकिन आज एएमयू द्वारा एकता मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई। यूनियन के इशारे पर उनके साथ भेदभाव किया गया। उन्होंने यूनियन पर दंगा के आरोपी को बचाने का आरोप लगाया और कहा कि एएमयू के अधिकारी यूनियन के दबाव में काम कर रहे हैं। एएमयू पीआरओ आफिस के मेंबर इंचार्ज प्रो. शाफे किदवई ने बताया कि कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ एक बैठक के उपरांत परिसर में आगामी 10 दिनों तक के लिए किसी भी प्रकार के जुलूस एवं प्रदर्शन पर तत्काल प्रभाव से पाबंदी लगा दी है। इसी क्रम में गुरुवार से बाबे सैयद पर चेकिंग अभियान चलाकर ही लोगों को प्रवेश दिया गया।
भगवा जलाने की फेसबुक पोस्ट पर दी तहरीर
ठाकुर अजय सिंह ने अपने आवास पर ही सिविल लाइन सीओ को तहरीर देते हुए बताया कि एएमयू के माजिन सुल्तान नाम के एक छात्र द्वारा फेसबुक आईडी से भगवा तक जलाने का एलान किया गया था। यदि मार्च के दौरान ऐसा होता तो शहर तथा विश्वविद्यालय का माहौल बिगड़ सकता था। उस छात्र ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि यदि मार्च में भगवा झंडा दिखा तो उसमें आग लाग दी जाएगी। अजय सिंह की तहरीर के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के साथ कासगंज पहुंचे मो. फहद
एएमयू छात्र संघ के सचिव मो. फहद पुलिस अधिकारियों एवं दो कैबिनेट सदस्यों के साथ दंगा प्रभावित कासगंज पहुंचे और कोतवाली में आईजी संजीव गुप्ता से बातचीत की। उन्होंने कहा कि किसी भी बेगुनाह को नहीं फंसने देंगे। कासगंज दंगा के विरोध में गत दिनों एएमयू में छात्र संघ द्वारा मार्च का आयोजन किया गया था। छात्र नेता कासगंज जाकर दंगा प्रभावित क्षेत्र का मुआयना एवं पीड़ित लोगों की मदद करना चाहते है। प्रशासन द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के कारण प्रतिनिधिमंडल कासगंज नहीं जा पाया था। गुरुवार को छात्र संघ के आग्रह पर सचिव मो. फहद के नेतृत्व में एक तीन सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल कासगंज पहुंचा। हालांकि तीनों छात्र नेता पुलिस की गाड़ी से कासगंज पहुंचे। उनके साथ पुलिसकर्मी भी थे। मो. फहद ने बताया कि कोतवाली में आईजी संजीव गुप्ता से बातचीत हुई। उन्होंने दंगा में मारे गए चंदन के परिजनों को 50 लाख एवं दंगा पीड़ित अकरम एवं नौशाद को 20-20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम यहां साथ-साथ मिलजुल कर रहते आए हैं और आगे भी वैसे ही रहें। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि पुलिस अधिकारियों का व्यवहार संतोषजनक रहा। आईजी खुद जांच करा रहे हैं। सचिव मो. फहद के साथ कैबिनेट मेंबर मतिन एवं नजमुल साकिर भी गए थे।