होली पर्व में अभी 16 दिन बाकी हैं। बाजारों में होली का रंग छाने लगा है। वहीं इस बार फुटकर बाजार लगने से पहले ही बाजार में पिचकारी का स्टॉक खत्म हो गया है। थोक व्यापारियों का कहना है कि दो साल से कोरोना के चलते पिचकारी की मांग कम रही थी। इस साल कोरोना की रफ्तार कम होने से साथ-साथ पिचकारी की मांग भी बढ़ गई। ऊपर से उत्पादन कम होने से पिचकारी बाजार से गायब हो गई है।
दो साल से कोरोना की मार झेल रहे बाजार को इस बार पंख लग गए। कोरोना का खतरा कम होने की वजह से होली पर बाजार में रौनक है। लोग पिचकारी, गुलाल, रंगों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। ऐसे में थोक बाजार से पिचकारी गायब हो गई है। व्यापारियों का कहना है कि दो साल से कोरोना के चलते बाजार बहुत सुस्त रहा। इस साल सरकार ने पाबंदियां हटाईं तो सेल भी बढ़ गई। दिल्ली में जो स्टॉक था वह बाजारों में पहले ही उतर गया। पिचकारी की मांग बढ़ने से वह शॉर्ट हो गई हैं। वहीं दिल्ली के व्यापारी पिचकारी का उत्पादन नहीं कर रहे हैं। ऐसे में पिचकारी के रेटों में भी उछाल आने की संभावना है। क्योंकि जिले के व्यापारियों के गोदाम खाली हैं। हालांकि गुलाल और रंग का अच्छा खासा स्टॉक है।
टंकी पिचकारी की अधिक मांग, स्टॉक खत्म
थोक व्यापारी सोमांक वार्ष्णेय आरएलवी ने बताया कि बाजार में लगभग 300 प्रकार की पिचकारियां उपलब्ध हैं। सबसे सस्ती पिचकारी 45 रुपये प्रति दर्जन की है। वहीं 450 रुपये पीस तक की पिचकारी है। सबसे अधिक मांग टंकी वाली पिचकारी की है। जिसे अधिकतर बच्चों के लिए लोग खरीदते हैं। वहीं बड़े भी टैंकर को पीछे लटका कर इसका आनंद लेते हैं। टंकी वाली पिचकारी 75 रुपये पीस से शुरू हो जाती है। जो 350-400 रुपये पीस तक उपलब्ध है, लेकिन सभी पिचकारियों का स्टॉक न के बराबर है।