अब कुलपति के नए पैनल को लेकर एएमयू में घमासान की आशंका है। जेएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. तारिक मंसूर को प्रबल दावेदार माना जा रहा हैं। वहीं विश्वविद्यालय के एक बड़े अधिकारी के नाम की चर्चा के बाद एएमयू की सियासत गर्म है। विजिटर (राष्ट्रपति) द्वारा तीन सदस्यों को नामित किए जाने के बाद लड़ाई रोचक दौर में पहुंच गई है।
एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल (ईसी) की बैठक 28 जनवरी को प्रस्तावित है। इसमें एएमयू के नए वीसी का पैनल बनना है। ईसी 5 सदस्यों का पैनल बनाकर मंजूरी के लिए एएमयू कोर्ट के पास भेजेगी, जिसमें से तीन नामों पर मुहर लगाकर विजिटर के पास भेजा जाएगा। 2 अप्रैल 2016 को भी ईसी की बैठक हुई थी जिसमें पांच नामों का पैनल बना था, लेकिन मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देशों का उल्लंघन होने के कारण पैनल को रद्द करना पड़ा था।
अब नये सिरे से प्रक्रिया शुरू होने के बाद एक बार फिर जोड़-तोड़ का खेल शुरू हो गया है। एएमयू के एक बड़े अधिकारी का नाम पैनल में शामिल कराने का प्रयास किया जा रहा है। इस चर्चा के बाद विश्वविद्यालय की राजनीति अचानक गरमा गई हैं। दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग एवं गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति के नाम की चर्चा है, लेकिन इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं हो रही हैं।
इन नामों के चर्चा के कारण भी पक्ष एवं विपक्ष में गोलबंदी हो रही है। एएमयू विजिटर (राष्ट्रपति) द्वारा ईसी में तीन सदस्यों को नामित किया गया है। अब यह भी कहा जा रहा है कि इनकी मौजूदगी में यूजीसी एक्ट 2010 को नजरअंदाज कर एएमयू एक्ट के हिसाब से पैनल बनाना आसान नहीं है। उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2016 का पैनल यूजीसी अधिनियम के अनुसार नहीं बना था। यूजीसी अधिनियम 2010 के अनुसार केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुलपति वहीं व्यक्ति बन सकता है, जिसके पास प्रोफेसर पद का 10 वर्ष का अनुभव हो। एएमयू में भी शैक्षणिक जगत के वीसी लाने की वकालत करने वाले लोगों की कमी नहीं है।
अप्रैल 2016 के पैनल में था इनका नाम -
- प्रो. तारिक मंसूर - प्राचार्य जेएन मेेडिकल कॉलेज (23 में 22 मत, 1 मत रद्द हुआ था)
- प्रो. फुरकान कमर - जनरल सेक्रेटरी एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटी
- डॉ. एहतेशाम हसनैन - पूर्व वीसी हैदराबाद यूनिवर्सिटी
- जावेद उस्मानी - उत्तर प्रदेश के मुख्य सूचना आयुक्त
- सैयद अहमद अली - एएमयू के सह कुलपति