फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अनोखी पहल: सूचना कार्यालय में लगेंगे कलम के सिपाहियों के चित्र, भुलाया नहीं जा सकता अलीगढ़ के इन पत्रकारों को

Fri, 30 May 2025 04:13 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

जैसे कार्यालयों में राष्ट्रपिता, पीएम, सीएम आदि के चित्र लगते हैं। अब अलीगढ़ के सूचना विभाग में कलम के सिपाहियों यानी पत्रकारों के चित्र लगेंगे, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में उल्लेखनीय योगदान दिया।
विज्ञापन
डीएम संजीव रंजन को पत्रकारों के दुर्लभ चित्र भेंट करते सुरेंद्र शर्मा व अन्य - फोटो : सूचना विभाग
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर अलीगढ़ में अनोखी पहल शुरू की गई है। स्वतंत्रता संग्राम में उल्लेखनीय योगदान देने वाले जनपद के कलम के सिपाहियों यानी पत्रकारों के चित्र सूचना विभाग कार्यालय में लगेंगे। आजादी का अमृत महोत्सव के जिला समन्वयक सुरेन्द्र शर्मा ने पांच दुर्लभ चित्र डीएम संजीव रंजन को भेंट किए।

विज्ञापन


डीएम कार्यालय में हिंदी पत्रकारिता दिवस पर एक समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उल्लेखनीय योगदान देने वाले अलीगढ़ जिले के वीर पत्रकारों और संपादकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। डीएम संजीव रंजन को आजादी का अमृत महोत्सव के जिला समन्वयक सुरेन्द्र शर्मा ने पांच दुर्लभ चित्र भेंट किए। 

हिंदी पत्रकारिता ने न केवल आजादी की लड़ाई को स्वर दिया, बल्कि पत्रकारों ने अपनी लेखनी और जीवन दोनों देश को समर्पित किए। ऐसे वीर पत्रकारों की स्मृतियाां हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं और सदैव रहेंगी।-संजीव रंजन, डीएम, अलीगढ़

विज्ञापन

अलीगढ़ की धरा से भी पत्रकार जगत ने आजादी की लड़ाई में अपनी आहूति दी है, इसको वास्तव में आज सही मंच मिला है। उस समय की विषम परिस्थियांे के बावजूद जब प्रेस पर अंग्रंेजों की पैनी नजर रहती थी आजादी की लड़ाई में सक्रिय योगदान देना अपने आप में चुनौतीपूर्ण कार्य था। ऐसे वीर शहीद पत्रकारों के विषय में आज के पत्रकार जब जानेंगे तो वह प्रोत्साहित होंगे कि विषम परिस्थितियों में भी सच्ची पत्रकारिता कैसे की जाती है।- संदीप कुमार, सहायक निदेशक सूचना, अलीगढ़

विज्ञापन

नहीं भुलाया जा सकता इनको

  • होती लाल वर्मा- वह वंदे मातरम समाचार पत्र के अलीगढ़ रिपोर्टर रहे, जिन्हें सन् 1908 में काला पानी की सजा दी गई। यह देश में किसी गैर-राजनीतिक व्यक्ति को दी गई पहली सजा थी। 
  • रमेश चंद्र आर्य- वह वीर अर्जुन के सहायक संपादक रहे,  जिन्हें 18 जून 1943 को अलीगढ़ जेल में क्रूर यातनाएं दी गईं और वह  शहीद हो गए। 
  • भगवान दास गौतम- वह क्रांतिकारी पत्रकार एवं संपादक थे, जो भगत सिंह के सहयोगी और उनके साथ लाहौर सेंट्रल जेल में निरुद्ध रहे। उन्होंने साइमन कमीशन विरोध में काले झंडे से विरोध प्रकट किया था। 
  • मदन लाल हितेषी- वह दैनिक प्रकाश अलीगढ़ के संपादक जोकि स्टेशन बम कांड में शामिल रहे।
  • अक्षय कुमार जैन-  वह टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के संपादकीय प्रभारी रहे। उन्होंने विजयगढ़ क्षेत्र के कई आंदोलनों का संचालन किया। आगरा के समाचार पत्र सैनिक के संपादक कृष्णदत्त पालीवाल उनके अच्छे मित्र थे। 
 
ये रहे मौजूद
इस दौरान डिप्टी कलैक्टर दिग्विजय सिंह, स्वतंत्रता सेनानी परिजन रजनी तौमर, सुरेश चन्द्र शर्मा, बसंत बंसल, धर्मवीर सिंह, कामेश गौतम, प्रशांत हितैषी, मुकेश भारद्वाज, सुरेन्द्र कुमार वार्ष्णेय, सागर मणि वार्ष्णेय, मोहित कुमार, पौपी कुमार, पत्रकार पंकज धीरज, नीरज शर्मा, देवेन्द्र वार्ष्णेय, बीएन शर्मा, राजकुमार, मुकेश कुमार सिंह, पुष्पेद्र कुमार, संजीव शर्मा व उड़ान सोसाइटी के अध्यक्ष ज्ञानेन्द्र मिश्रा उपस्थित रहे। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें