दवाओं के फायदे हैं तो नुकसान भी कम नहीं। ऐसे में लोग बिना रसायनिक दवाओं का सेवन किए दर्द से छुटकारा पाने का उपाए ढूंढते हैं। यहीं कारण है कि आज समाज में फिजियोथेरेपिस्ट की मांग बढ़ गई है। फिजियोथेरेपी की सहायता से आप दवा का सेवन किए बिना भी तकलीफ से छुटकारा पा सकते हैं।
इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट के उत्तर प्रदेश के महासचिव डॉ. कौशलेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में लोगों की जीवन शैली में व्यापक परिवर्तन आया है। इसकी वजह से फिजियोथेरेपी की भूमिका बढ़ गई है। वह कहते हैं कि किसी भी कारण से जीवन जीने की गुणवत्ता में कमी आई है तो फिजियोथेरेपी जरूरी है। मांसपेशियों में कमजोरी, जोड़ों एवं हड्डियों में जकड़न और गैर संचारी रोगों की रोकथाम में इसकी भूमिका बढ़ती जा रही है। इस स्वास्थ्य प्रणाली में लोगों का परीक्षण किया जाता है और उपचार प्रदान किया जाता है। इसके अंतर्गत वे उपचार आते हैं, जिनमें व्यक्ति की गतिशीलता आयु, चोट, बीमारी एवं वातावरण संबंधी कारणों से खतरे में पड़ जाती है। डॉ. शर्मा कहते हैं कि वर्तमान समय में फिजियोथेरेपी के बिना खेल की कल्पना असंभव है।
फिजियोथेरेपी के कुछ विशेषज्ञता क्षेत्र
कार्डियोपल्मोनरी चिकित्सा, जराचिकित्सा, स्नायु संबंधी चिकित्सा, अस्थि रोग चिकित्सा और बालरोग चिकित्सा आदि।
फिजियोथेरेपी से कुछ दर्द में तो तुरंत आराम मिलता है पर स्थाई परिणाम के लिए थोड़ा वक्त लग जाता है। दर्द निवारक दवाओं की तरह इससे कुछ ही घंटों में असर नहीं दिखाई देता। खासकर फ्रोजन शोल्डर, कमर व पीठ दर्द के मामलों में कई सिटिंग्स लेनी पड़ सकती हैं। कई मामलों में व्यायाम भी करना पड़ता है और जीवनशैली में बदलाव भी।
- डॉ. केके शर्मा, महासचिव, उत्तर प्रदेश
अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि घुटनों के दर्द से निजात पाने में सर्जरी के 80 फीसदी मामले व्यायाम व फिजियोथेरेपी की कमी के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाते। कई मामलों में कूल्हे व घुटने के प्रत्यारोपण व फ्रैक्चर के बाद उनके रिहैबिलिटेशन में भी फिजियोथेरेपी लेने की सलाह दी जाती है। चिकित्सक भी कई मामलों में फिजियोथेरेपी जरूरी मानते हैं।
- डॉ. मुकुल, सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट
फिजियोथेरेपी का दायरा सिर्फ मांसपेशियों और हड्डियों तक सीमित नहीं है। इसकी सीमा में वो तंत्रिकाएं भी आती हैं जो हमारे शरीर के विभिन्न अंगों को नियंत्रित करती हैं। उदाहरण के तौर पर अस्थमा या किसी भी तरह के सांस के रोगों को ही लें। कार्डियोवस्कुलर फिजियोथेरेपिस्ट इस तरह के मरीजों को सांस रोकने और छोड़ने वाले व्यायाम या गुब्बारे फुलाने जैसे अभ्यास के जरिये ठीक करता है।
- डॉ. अक्षय रस्तोगी, फिजियोथेरेपिस्ट
डॉ. मुकुल।- फोटो : CITY OFFICE
डा. अक्षय रस्तोगी।- फोटो : CITY OFFICE