बस एक क्लिक और वह लम्हा हमेशा के लिए सिल्वर ब्रोमाइड की शीट पर कैद हो गया। यही विशेषता है फोटोग्राफी की। उस क्षण में गुजरे वास्तविक दृश्य को कैद करने की क्षमता किसी और विधा में नहीं है। लेकिन फोटोग्राफी के 200 साल के लंबे इतिहास में अब बहुत बदलाव आ गया है। फोटोग्राफी के पारंपरिक तौर-तरीकों से लेकर लोगों की पसंद तक बदल चुकी है। डिजिटल युग में अब हर व्यक्ति फोटोग्राफर है। ये कहना है 1946 में अलीगढ़ के अंदर पहला फोटो स्टूडियो खोलने वाले गुप्ता परिवार के सुरेश चंद्र गुप्ता का।
सुरेश चंद्र गुप्ता कहना है कि अब स्टूडियो फोटोग्राफी का अंत हो चुका है। अब केवल शादी समारोह, पारिवारिक समारोह, सरकारी समारोह या ऐसे ही समारोहों में व्यावसायिक फोटोग्राफी सीमित रह गई है। इसके अलावा अब फोटोग्राफी में तकनीक का हस्तक्षेप काफी बढ़ गया है। सुरेश चंद गुप्ता कहते हैं कि उनके परिवार की तीन पीढ़ियां फोटोग्राफी के क्षेत्र से अपनी आजीविका अर्जित करती रहीं। लेकिन चौथी पीढ़ी ने जब देखा कि इस क्षेत्र में अब कोई भविष्य नहीं है तो उन्होंने नौकरी के क्षेत्र में जाने का फैसला किया। उनका कहना है कि अब हर व्यक्ति फोटोग्राफर है और कह सकते हैं कि इससे फोटोग्राफी का विस्तार भी हुआ है। लेकिन पारंपरिक तरीके की फोटोग्राफी का अब अंत हो गया है। अब डिजिटल प्लेटफॉर्म फोटोग्राफी को एक बड़ा मंच प्रदान कर रहे हैं।
पिछले दो दशक में कोई नया फोटो स्टूडियो शहर में नहीं
अलीगढ़। एक वक्त था जब शहर के किसी मार्केट में फोटो स्टूडियो एक शान की बात माना जाता था। लोग उसके नाम से उस जगह की पहचान कर लिया करते थे। लेकिन पिछले दो दशक में शहर में कोई भी नया फोटो स्टूडियो नहीं खुला है। बल्कि, कुछ पुराने स्टूडियो बंद जरूर हो गए हैं। अचल तालाब पर, माल गोदाम सिटी साइड, रघुवीर पुरी, जय गंज, आगरा रोड आदि में पुराने फोटो स्टूडियो बंद हो गए हैं। पिछले दो दशक में कलर लैब जरूर खुल गई हैं।
समय की थमी रफ्तार: शहर के बीचोंबीच बने घंटाघर पर एतिहासिक घड़ी लगी है। मगर, नगर निगम। प्रशासन की अ?- फोटो : CITY OFFICE