प्रहलाद अग्रवाल अमर उजाला पढ़ते।
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कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते हुए लॉक डाउन की तन्हाई और गर्मियों के लंबे होते दिन। कोई कहां तक टीवी देखे कहां तक मोबाइल खंगाले। ऐसे में वह दंपति जो सामान्य दिनों में दिनचर्या की आपाधापी में समय नहीं दे पाते थे, अब फुर्सत से साथ मिलकर अमर उजाला पढ़ रहे हैं। इस तरह अखबार पढ़ना एक बिल्कुल ही नया अनुभव है। आइए जानते हैं पाठकों ने अनुभव साझा करते हुए क्या कहा:
सामान्य दिनों में घर के कामकाज में इतनी व्यस्तता रहती है कि हम लोग एक दूसरे को समय ही नहीं दे पाते। मुझे याद नहीं कभी साथ बैठकर अखबार भी पढ़ा हो। लेकिन इन दिनों न कहीं जाने की जल्दी है और न कहीं से घर पहुंचने की मारामारी है। हमारे यहां अमर उजाला आता है। हम दोनों साथ बैठकर अखबार पढ़ते हैं तो यह हमारे लिए अलग ही तरह का अनुभव होता है। अखबार में छपी खबरों पर साथ साथ विचार-विमर्श भी चलता रहता है और हास परिहास भी ।
-राकेश सिंह चौहान, पूर्व प्रबंधक, अलीगढ़ ग्रामीण बैंक व उनकी पत्नी रेनू सिंह
सेना में सेवाएं देने के बाद अब मैं शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हूं। सामान्य दिनों में मेरे हाथ में अखबार और चाय की प्याली रहती है और अकेले ही अकेले सारा चिंतन मनन हो जाए करता था। लेकिन इन दिनों लॉक डाउन की अवधि के दौरान साथ-साथ अख़बार पढ़ने का समय मिल रहा है। यह हमारे लिए एक अलग तरह का खुशनुमा एहसास है। बहुत अच्छा लग रहा है। ऐसा लगता है अखबार के माध्यम से परिवार एकजुट हो रहा है।
सुरेश सिंह राघव, पूर्व सैनिक व उनकी पत्नी चंदा राघव
इस वैश्विक महामारी के चलते सोशल मीडिया तरह तरह के ज्ञान की भरमार है । इसी श्रृंखला में अखबार के बारे में तमाम गलत तथ्य परोसे जा रहे हैं कि अखबार से भी कोरोना हो सकता है। जबकि अखबार को पढ़ने में कोई नुकसान नहीं है। इस बात को प्रधानमंत्री भी कह चुके हैं। इस तरह का प्रयास में भी अपनी सोसायटी वासियों व रोटरी भाइयों को कर रहा हूं । अखबार पूरी तरह से सुरक्षित है । इस विषम परिस्थिति में आप तक समाचार पत्र पहुंचाने वालों को ऑनलाइन भुगतान करें ताकि अखबार प्राप्त करने में व्यवधान न पड़े ।
प्रह्लाद अग्रवाल, चार्टर अध्य्क्ष, रोटरी क्लब पैंथर