देशी शराब के दो ब्रांड अलीगढ़ में सर्वाधिक बिक रहे हैं। जिसमें 95 फीसदी बिक्री वाला गुड इवनिंग ब्रांड लगभग आठ साल पुराना है, ये प्लास्टिक की बोतल में पैक होता है और हरदुआगंज स्थित वेब डिस्टलरी में बनता है, यहां से प्रदेश के कई जिलों में इसकी आपूर्ति होती है। ये पहला मौका है जब इस ब्रांड से अलीगढ़ में मौतें हुई हैं। गुड इवनिंग की जो शराब सवालों के घेरे में है। वह मार्च के बैच नंबर से बनी है। दूसरा बार्डर नाम का ब्रांड इस वर्ष ट्रेटा पैक के रूप में पहली बार लांच हुआ है।
उक्त दोनों शराब की कीमत 80 रुपये है, जिसमें 52 रुपये तक आबकारी टैक्स है। शराब की कीमत लगभग 28 रुपये तक होती है। 28 रुपये में शराब, पैकिंग, डिस्टलरी, डीलर और ठेकेदार का खर्च और आय दोनों शामिल हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसकी गुणवत्ता क्या होती होगी..? इन्हीं दोनों ब्रांड की शराब पीने से अलीगढ़ में शुक्रवार को मरने वालों की लाइन लग गई। ये सब कुछ शासन स्तर से बनी आबकारी नीति के अनुसार तय होता है। इसलिए इसमें स्थानीय दखल नहीं है।
जिला आबकारी अधिकारी धीरज शर्मा ने बताया कि उन्हें इस प्रकरण की जानकारी शुक्रवार सुबह लगभग सवा छह बजे मिली थी, 20 मिनट बाद वह खुद अपनी कार से घटनास्थल पर पहुंचे। वहां अन्य अधिकारियों और पुलिस के साथ जांच पड़ताल कराई। जांच में घटनास्थल के इर्दगिर्द की दुकानें चेक करने पर ऐसा कोई माल नहीं मिला, जिससे दुकानों में मिलावट की कोई बात साबित हो सके। फिर भी एहतियातन दुकानें बंद कराई गई हैं। पूरा माल चेक कराया जा रहा है। जिससे कोई शक की गुंजाइश न रहे।
उन्होंने बताया कि इस प्रकरण में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जा रहे शराब कारोबारी अनिल चौधरी (जिला पंचायत सदस्य ममता चौधरी के पति) व और उनके परिजनों के नाम से 10 के करीब ठेके हैं। वहीं पूर्व ब्लाक प्रमुख रेनू शर्मा के पति ऋषि शर्मा और भाई मुनि शर्मा के परिजनों के नाम लगभग छह ठेके हैं। दोनों ही शराब कारोबारी पुराने हैं। सभी की जांच पड़ताल जारी है।