एक महिला ने अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद स्वस्थ बच्चे के साथ महिला घर लौट आई। लेकिन आने से पहले अस्पताल में कोरोना का केस आ गया। घर पहुंचकर महिला इतनी डर गई कि वह न तो अपने बच्चे को छू रही थी और न ही घर के किसी सदस्य को अपने को छूने दे रही थी। उसे लग रहा था कि वह कोरोना वायरस की चपेट में आ गई है। उसे हर चीज में वायरस नजर आ रहा था। बाद में यह बात मनोचिकित्सकों तक पहुंची और उपचार के बाद अब महिला स्वस्थ है। यह कही दूर की नहीं बल्कि अपने शहर की चंद रोज पहले की हकीकत है।
मनोचिकित्सक डॉ. अंतरा गुप्ता कहती है कि कोरोना वायरस एवं लॉकडाउन के कारण उपजे हालात के कारण कई तरह की मनोवैज्ञानिक समस्याएं सामने आ रही है। ऑब्सेसिव कंप्लसिव डिसॉर्डर ( ओसीडी) से पीड़ित मरीज भी सामने आ रहे हैं। मार्च से लॉकडाउन चल रहा है। मानसिक समस्याओं से ग्रसित मरीजों को दो महीने से उपचार नहीं मिलने के कारण अब उनकी बीमारी गंभीर हो चुकी है। कुछ मरीज तो इस वहम के शिकार हो गए हैं कि दो साल बाद यानी 2022 में दुनिया खत्म हो जाएगी। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए 20 से 30 सेकेंड तक हाथ धोना सही है। लेकिन वहम का शिकार होकर बार-बार और दिन भर में कई बार हाथ धोते रहना या सफाई में घंटो समय देना भी बीमारी का लक्षण है। ऐसी समस्याएं लगातार आ रही हैं।
और कैसी समस्याएं आ रही सामने : घर में घुसते ही घबराहट, बाहर कोई दिक्कत नहीं, जरूरत से ज्यादा सफाई पर ध्यान, बार-बार और जरूरत से ज्यादा हाथ, कपड़ा या घर की सफाई, स्कूल-कॉलेज बंद होने से पढ़ाई का नुकसान, इसकी वजह से अवसाद, अकारण घबराहट, नींद नहीं आना, मन उदास रहना, बार-बार नकारात्मक सोचना।
छोटे बच्चों की पढ़ाई को लेकर ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है। प्रतियोगी परीक्षा वाले छात्र अपनी पढ़ाई जारी रखें। कोचिंग व क्लास आदि में जाने-आने में जो समय लगता था, उसे अपने हॉबी को पूरा करने में व्यतीत करें। ऑनलाइन क्लास के अपने फायदे भी हैं। समय का बेहतर प्रबंधन करें। किसी भी तरह की मनोवैज्ञानिक समस्याएं होने पर मनोचिकित्सक से ऑनलाइन परामर्श ले सकते हैं। समय पर उपचार कराना बेहद जरूरी है।
- डॉ. अंतरा गुप्ता, मनोचिकित्सक