चुनाव थे तब वादे किये थे, हमें जिताओ... हम गांव को चमकाएंगे। अब ताजपुर कि जनता पूछ रही है, हमारी खता क्या है? क्या हुआ तेरा वादा...। क्यों नहीं बन रही सड़क। कस्बे में करीब हजार मीटर की पूरी सड़क गायब है।
हल्की सी बारिश पर सड़क तालाब बन रही है। डाबर स्टेशन के लिए भी इसी रास्ते तमाम गांवों के सैकड़ों लोक आवागमन करते हैं। सड़क की एक साइड पर पूरी आबादी पानी और कीचड़ के दंश से त्रस्त है। इसी सड़क के लिए 2014 के लोकसभा चुनाव का गांव वालों ने बहिष्कार किया था।
करीब 2000 मतदाता हैं और प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद महज 2 वोट ही पड़ सके थे। इसके बावजूद सांसद, विधायक से लेकर प्रशासनिक अमले तक ने सड़क निर्माण पर पलटकर ध्यान नहीं दिया। दो वर्ष से सड़क अस्तित्व ही खो चुकी है।
गांव वालों के अनुसार, सांसद, विधायक, पीडब्ल्यूडी और प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं। गांव के प्रेम कुमार चौहान, जितेंद्र सिंह, धीरेंद्र सिंह प्रधान, कुलदीप चौहान, दलवीर सिंह, जयवीर सिंह कहते हैं सड़क नहीं बनी तो 2017 में फिर चुनाव का बहिष्कार होगा। एक भी व्यक्ति इस बार विधानसभा चुनाव में वोट नहीं डालेगा।