जिले के किसानों का रुझान अब पारंपरिक फसलों से हटकर नकदी फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। गेहूं, मक्का और बाजरा जैसी फसलों के स्थान पर अब मूंगफली किसानों के लिए समृद्धि की नई राह बनती जा रही है। बेहतर पैदावार और बाजार में अच्छी कीमत मिलने के कारण पिछले कुछ वर्षों में जिले में मूंगफली का रकबा लगातार बढ़ा है।
करीब तीन दशक पहले भी जिले में मूंगफली की खेती का अच्छा चलन था, जो समय के साथ कम हो गया था। अब एक बार फिर किसान इस नकदी फसल की ओर लौट रहे हैं। कृषि विभाग के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में मूंगफली का रकबा तेजी से बढ़ा है और इस वर्ष इसके 20 हजार हेक्टेयर से अधिक होने की संभावना है। जिले में अतराैली, पालीमुकीमपुर, काजिमाबाद, बराैली, जवां, चंडाैस, खैर व इगलास क्षेत्र में किसान मूंगफली की फसल उगा रहे हैं।
डेढ़ से दो महीने में तैयार होती है फसल
उप कृषि निदेशक चौधरी अरुण कुमार के अनुसार जिले में मूंगफली का रकबा क्षेत्र भी बढ़ रहा है। यदि किसान उन्नत बीज और वैज्ञानिक तरीके अपनाएं तो मूंगफली की खेती से उनकी आय और बढ़ सकती है। जिले में दोमट मिट्टी और जलवायु मूंगफली के लिए अनुकूल है, जिससे अच्छी पैदावार मिलती है। यह फसल 90 से 120 दिन में तैयार हो जाती है। सबसे खास बात है कि कम सिंचाई में भी अच्छी उपज देती है।
पहले हम बाजरा और मक्का उगाते थे, लेकिन पिछले दो साल से मूंगफली बो रहे हैं। इसमें पैदावार अच्छी मिलती है और बाजार में दाम भी ठीक मिल जाता है, जिससे मुनाफा बढ़ गया है।
- सुरेश शर्मा, काजिमाबाद
मूंगफली की फसल ज्यादा जोखिम वाली नहीं है। अगर मौसम ठीक रहा तो उत्पादन अच्छा होता है और व्यापारी खेत से ही इस फसल को खरीद लेते हैं। इस फसल में काफी फायदा हो रहा है।
- कपिल कुमार, अतराैली
मूंगफली की खेती में लागत कम आती है और फसल जल्दी तैयार हो जाती है। इसलिए अब गांव के कई किसान इसकी खेती शुरू कर रहे हैं। बाजार में भी इसकी मांग बनी रहती है।
- शोभित भारद्वाज, पालीमुकीमपुर
मूंगफली से तेल, नमकीन और अन्य खाद्य उत्पाद बनाए जाते हैं। इसलिए बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। इसी वजह से किसानों को अच्छी कीमत मिलने की संभावना रहती है।
- विकास कुमार, काजिमाबाद
खास बातें -
साल दर साल तेजी से बढ़ रहा रकबा
वर्ष 2023 - 14, 000 हेक्टेयर
वर्ष 2024 - 16, 000 हेक्टेयर
वर्ष 2025 - 19,000 हेक्टेयर
वर्ष 2026 - 20, 000 हेक्टेयर ( संभावित लक्ष्य )