नर्तकी को पार्वती बताना उचित नहीं
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सिंधु घाटी की खुदाई में प्राप्त डांसिंग गर्ल को पार्वती के रूप में पेश किए जाने पर केरल के त्रिवेंद्रम में आयोजित इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस के 77वें अधिवेशन में चिंता जताई गई। इतिहासकारों ने कहा कि इससे दुनिया में यह संदेश जाएगा कि इतिहास लेखन को लेकर भारतीय गंभीर नहीं हैं। यह अधिवेशन बीती 28 से 30 दिसंबर तक त्रिवेंद्रम की यूनिवर्सिटी ऑफ केरला में आयोजित किया गया था।
इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस के सचिव प्रो. इशरत आलम ने बताया कि अधिवेशन में मकबरों के संरक्षण एवं बचाव के लिए होने वाले कार्यों में इतिहासकारों को शामिल करने की मांग की गई। इससे संबंधित प्रस्ताव पारित किया गया। कहा गया कि रेनोवेशन के बाद दिल्ली स्थित हुमायूं का मकबरा का देखने में अच्छा तो लग सकता है, लेकिन उसकी मौलिकता खतरे में पड़ गई है।
प्रो. आलम ने बताया कि दिल्ली स्थित खान-ए-खाना एवं बीजापुर के स्मारक को प्राइवेट संस्था को सौंप दिया गया है। रेनोवेशन एवं निर्माण में आर्किलॉजिकल नियमों व नीतियों का पालन नहीं किया जाता है। यह गंभीर मसला है। हिस्ट्री कांग्रेस ने आर्किलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से ऐतिहासिक स्मारकों की मौलिकता बचाए रखने के लिए सर जॉन मार्शल की संरक्षण से संबंधित नीति के आधार पर काम कराने की मांग की है। इसके अलावा मशहूर इतिहासकार प्रो. विपिन चंद्रा की पुस्तक इंडियाज स्ट्रगल फॉर इनडिपेंडेंस पर लगे प्रतिबंध को हटाने के लिए भी प्रस्ताव पारित किया गया।
इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस का यह पहला अधिवेशन है, जिसमें राष्ट्रपति शामिल हुए। एएमयू के लिए फख्र की बात यह है कि वर्तमान में इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस की अध्यक्ष प्रो. शीरीन मूसवी एवं सचिव प्रो. इशरत आलम एएमयू के इतिहास विभाग से हैं। इस अधिवेशन में प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब के अलावा एएमयू के करीब 36 शोध छात्र एवं शिक्षक शामिल हुए। इसमें प्रो. रोमिला थापर एवं प्रो. केएम श्रीमाली जैसे विख्यात इतिहासकारों के अतिरिक्त केरल के राज्यपाल, मुख्यमंत्री भी शामिल हुए।