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Aligarh News: बादल बाबू का मामला पाकिस्तान की अदालत ने सरकार पर छोड़ा

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बादल बाबू और सना रानी। संवाद
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गांव नगला खिटकारी निवासी बादल बाबू के वकील फ़ियाज रामे ने पाकिस्तान के कराची हाईकोर्ट में वाद दायर किया, जहां बादल बाबू की रिहाई की मांग रखी। वकील ने बताया कि हाईकोर्ट ने बादल बाबू को भारत भेजने या नागरिकता देने का फैसला पाकिस्तान की सरकार पर छोड़ा है।
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वकील फियाज रामे ने बताया कि वर्ष 2024 में बादल बाबू पाकिस्तान के मंडी बहाउद्दीन इलाके में अपनी प्रेमिका सना रानी से मिलने पहुंच गया गया था, जहां 27 दिसंबर 2024 में गलत तरीके से बार्डर पार करने के जुर्म में पाकिस्तान पुलिस ने उसे जेल भेज दिया था और कोर्ट ने एक साल की सजा सुनाई थी।


सजा वह पूरी कर चुका है, अब भारत वापस भेजने में आ रही परेशानी को देखते हुए वकील ने कराची हाईकोर्ट में वाद दायर किया, जिसमें मांग की गई कि बादल बाबू ने पाकिस्तान की नागरिकता मांगी थी न तो उसे नागरिकता दी गई न ही उसे भारत वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई, जबकि वह सजा भी पूरी कर चुका है। हाईकोर्ट ने इसमें आदेश देते हुए गेंद पाकिस्तान की सरकार के पाले में डाल दी है।
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फ़ियाज़ रामे के मुताबिक कराची हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकार चाहे तो उसे नागरिकता दे अथवा भारत डिकोड करे। वकील ने कहा कि यदि पाकिस्तान सरकार इसमें कोई जल्द निर्णय नहीं लेती तो वह पुनः कोर्ट का रुख करेंगे।


सना जेल में दो बार बादल से मिली
वकील का दावा है कि सना रानी दो बार बादल बाबू से जेल में मुलाकात कर चुकी है, उनका दावा है कि बादल बाबू की मोहब्बत एक तरफा नहीं बल्कि दोनों तरफ से वह एक दूसरे को चाहते हैं। अब नजरें सरकार की ओर गढ़ गई हैं कि बादल बाबू को डिकोड किया जाएगा या उसे वहां की सरकार अपने यहां की नागरिकता देगी। वहीं वकील सना रानी से भी संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं।
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