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Aligarh News: यूजीसी पर घमासान, हिंदू सम्मेलन में साध्वी प्राची का विरोध, हंगामा और प्रदर्शन

Tue, 27 Jan 2026 10:03 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

साध्वी प्राची बार-बार हिंदुत्व के नारे से प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश करती रहीं, लेकिन वह लोग इसे काला कानून बताते हुए नारेबाजी करते रहे। इस पर प्राची ने नारा दिया जाति- पाति की करो विदाई, हिंदू- हिंदू भाई- भाई। इस पर विरोध करने वाले भड़क गए।
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हिंदू सम्मेलन में साध्वी प्राची - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अलीगढ़ के अचलताल स्थित रामलीला मैदान में 26 जनवरी को आयोजित हिंदू सम्मेलन में यूजीसी के नए नियमों के विरोध में जमकर हंगामा हुआ। मंच पर मुख्य वक्ता विश्व हिंदू परिषद की केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की सदस्य डाॅ. साध्वी प्राची हिंदू एकता की बात कर रहीं थीं, इसी बीच बड़ी संख्या में हाथों में काली पट्टी बांधे और यूजीसी नियमों के विरोध के नारे लिखीं तख्तियां लेकर पहुंच गए। नारेबाजी के बीच आयोजकों और प्रदर्शन करने वालों की बीच धक्कामुक्की हो गई।

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साध्वी गिरते-गिरते बची, उन्होंने आयोजकों और प्रशासन से इस अव्यवस्था पर नाराजगी भी जताई। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने समझाने की कोशिश की और कहा कि संघ में इस पर गहन चिंतन और मंथन हो रहा है, लेकिन उनकी बात भी नहीं सुनी गई। साध्वी मंच से प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश करने लगीं। कहती रहीं कि हम आपके साथ हैं। उन्होंने स्थिति को संभालने के लिए मंच से ही यूजीसी कानून वापस लेने की मांग करते हुए नारेबाजी भी की। कहा कि कुछ लोगों के खिलाफ सख्त कदम भी उठाया जा सकता है।मगर, विरोध करने वाले फिर भी नहीं रुके।
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हिंदू सम्मेलन में दोपहर 2.45 बजे साध्वी प्राची मंच पर आ गईं। कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया, इसके बाद आरएसएस के प्रांतीय शारीरिक प्रमुख रामशंकर ने सम्मेलन को संबोधित किया। इसके बाद संबोधित करने साध्वी प्राची आईं और उन्होंने भाषण देना शुरू कर दिया। इसी बीच यूजीसी का विरोध करने वाले हाथों में काली पट्टी और तख्ती लिए हुए रामलीला मैदान में घुसने लगे।

इसे देखकर महानगर संघचालक अजय सराफ, सह संघचालक देवेंद्र कुमार, महानगर कार्यवाह रतन कुमार, सह कार्यवाह पंकज कुमार आदि उन्हें रोकने के लिए दौड़े। सुमित शर्मा शिब्बो के साथ यूजीसी का विरोध कर रहे लोग धक्का- मुक्की करके अंदर आने लगे। इस पर साध्वी प्राची ने विरोध करने वालों को अंदर बुला लिया। बोली, यूजीसी का विरोध कर रहे हो हम भी तुम्हारे साथ हैं। तुम लोग आराम से बैठ जाओ। विरोध करने वाले नहीं रुके और मंच पर चढ़ने के लिए अमादा हो गए। राम अवतार शर्मा, संघ के लकी कुमार बीच- बचाव में आए तो उन्हें भी खींच लिया गया, वे जबरदस्ती मंच पर चढ़ने के लिए अमादा थे। काफी देर तक यहां हंगामा होता रहा।

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जाति-पाति की करो विदाई, हिंदू- हिंदू ...भाई- भाई

साध्वी प्राची बार-बार हिंदुत्व के नारे से प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश करती रहीं, लेकिन वह लोग इसे काला कानून बताते हुए नारेबाजी करते रहे। इस पर प्राची ने नारा दिया जाति- पाति की करो विदाई, हिंदू- हिंदू भाई- भाई। इस पर विरोध करने वाले भड़क गए और कहा कि एक तरफ एकजुटता की बात कर रहे हो,दूसरी तरफ यूजीसी के माध्यम से हमें बांटा जा रहा है।
मंच पर प्रदर्शनकारियों ने चढ़ने की कोशिश की तो नगर कार्यवाह विमल आगे आएं, जिनका हाथ पकड़ कर नीचे खींच लिया गया और वह गिरते हुए बचे। प्रदर्शनकारी मंच के सामने ही धरने पर बैठ गए, फिर सड़क पर जाम लगा दिया। किसी तरह पुलिस ने उन्हें सड़क से हटाया। उधर, यूजीसी कानून का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों में शामिल सुमित कुमार शिब्बो का कहना था कि हिंदू सम्मेलन में आए थे, प्रदर्शन का कोई इरादा नहीं था। सम्मेलन में जब बात रखी तो साध्वी प्राची ने सकारात्मक जवाब देने की बजाय हिंदू-हिंदू भाई-भाई कहकर राजनीति सिखाने की कोशिश की थी। उन्होंने यूजीसी के काले कानून को वापस लेने की मांग की। 

आजादी चरखे से नहीं बल्कि क्रांतिकारियों के फांसी के फंदे पर झूलने से मिली - प्राची
अलीगढ़। हंगामे से पूर्व हिंदू सम्मेलन में साध्वी प्राची ने अयोध्या हुई हमारी है अब मथुरा की बारी है से अपने भाषण की शुरुआत की। इसके बाद वह महात्मा गांधी का बिना नाम लिए कहा कि आजादी चरखे से नहीं बल्कि भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के फांसी के फंदे पर झूलने से मिली है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता घोषित कर दिया। जबकि देश धर्म पर अपना पूरा परिवार बलिदान करने वाले गुरु गोविंद सिंह हमारे लिए महान हैं। उन्होंने कहा कि 1400 वर्ष पुराने पंथ ने 56 देश बना लिए, मगर हमारी संस्कृति आदि अनंत है। हमारा एक भी देश नहीं है।
            
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