साध्वी प्राची बार-बार हिंदुत्व के नारे से प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश करती रहीं, लेकिन वह लोग इसे काला कानून बताते हुए नारेबाजी करते रहे। इस पर प्राची ने नारा दिया जाति- पाति की करो विदाई, हिंदू- हिंदू भाई- भाई। इस पर विरोध करने वाले भड़क गए और कहा कि एक तरफ एकजुटता की बात कर रहे हो,दूसरी तरफ यूजीसी के माध्यम से हमें बांटा जा रहा है।
मंच पर प्रदर्शनकारियों ने चढ़ने की कोशिश की तो नगर कार्यवाह विमल आगे आएं, जिनका हाथ पकड़ कर नीचे खींच लिया गया और वह गिरते हुए बचे। प्रदर्शनकारी मंच के सामने ही धरने पर बैठ गए, फिर सड़क पर जाम लगा दिया। किसी तरह पुलिस ने उन्हें सड़क से हटाया। उधर, यूजीसी कानून का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों में शामिल सुमित कुमार शिब्बो का कहना था कि हिंदू सम्मेलन में आए थे, प्रदर्शन का कोई इरादा नहीं था। सम्मेलन में जब बात रखी तो साध्वी प्राची ने सकारात्मक जवाब देने की बजाय हिंदू-हिंदू भाई-भाई कहकर राजनीति सिखाने की कोशिश की थी। उन्होंने यूजीसी के काले कानून को वापस लेने की मांग की।
आजादी चरखे से नहीं बल्कि क्रांतिकारियों के फांसी के फंदे पर झूलने से मिली - प्राची
अलीगढ़। हंगामे से पूर्व हिंदू सम्मेलन में साध्वी प्राची ने अयोध्या हुई हमारी है अब मथुरा की बारी है से अपने भाषण की शुरुआत की। इसके बाद वह महात्मा गांधी का बिना नाम लिए कहा कि आजादी चरखे से नहीं बल्कि भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के फांसी के फंदे पर झूलने से मिली है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता घोषित कर दिया। जबकि देश धर्म पर अपना पूरा परिवार बलिदान करने वाले गुरु गोविंद सिंह हमारे लिए महान हैं। उन्होंने कहा कि 1400 वर्ष पुराने पंथ ने 56 देश बना लिए, मगर हमारी संस्कृति आदि अनंत है। हमारा एक भी देश नहीं है।