अलीगढ़ का नाम बदलकर हरिगढ़ किए जाने की चर्चाओं के बीच नगर निगम के विपक्षी पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है। सपा, बसपा और कांग्रेस के पार्षदों ने नाम परिवर्तन का विरोध करते हुए राज्यपाल के नाम मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। पार्षदों ने स्पष्ट कहा कि नाम बदलने का कोई प्रस्ताव नगर निगम सदन में न तो प्रस्तुत हुआ और न ही पारित किया गया है। इसके विरोध में वे सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेंगे।
विपक्षी पार्षदों के मुताबिक वर्ष 2023 में भाजपा के एक पार्षद ने नगर निगम सदन में अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ किए जाने का मौखिक सुझाव दिया था। इस पर विपक्षी पार्षदों ने तत्काल आपत्ति जताई थी। उनका दावा है कि उस दौरान हुई सदन की कार्यवाही की वीडियोग्राफी नगर निगम के रिकॉर्ड में मौजूद है। साथ ही, संबंधित सुझाव का नगर निगम की किसी भी कार्यवाही में लिखित प्रस्ताव के रूप में उल्लेख नहीं है।
पार्षदों ने नाम परिवर्तन को लेकर चल रही चर्चाओं और प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि नगर निगम में इस संबंध में कोई प्रस्ताव ही नहीं आया, तो नाम बदलने की बात किस आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि नाम परिवर्तन का मुद्दा चुनावी राजनीति से प्रेरित है और इसके जरिये शहर की वास्तविक समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। विपक्षी पार्षदों ने कहा कि शहर में विकास, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, जलभराव, खराब सड़कें और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे प्राथमिकता में होने चाहिए। इन समस्याओं के समाधान के बजाय नाम परिवर्तन को लेकर सरकारी मशीनरी और धन खर्च करना उचित नहीं है।उन्होंने कहा कि नाम बदलने की स्थिति में सरकारी दस्तावेजों, साइन बोर्ड, विभागीय रिकॉर्ड समेत विभिन्न व्यवस्थाओं में बदलाव करना पड़ेगा। इस पर जनता के पैसे खर्च होंगे।
पार्षदों ने सवाल उठाया कि जब शहर की मूलभूत समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं, तो नाम परिवर्तन पर सरकारी धन खर्च करना कितना उचित है।ज्ञापन देने वालों में सपा पार्षद दल के नेता नईम अहमद, मुशर्रफ हुसैन महजर, असलम नूर, हफीज अब्बासी, कांग्रेस पार्षद बिजेंद्र बघेल, बसपा पार्षद मनोज कुमार, सपा पार्षद आसिफ अल्वी, नसरीन बेगम, जीनस अब्बासी, शबाना असलम, आसिया बेगम, शाहीन बेगम, गुलजार गुड्डू, उस्मान खान, आदिल खान, रिहाना बेगम, अफसाना बेगम, नूर अब्बासी और उम्मेद आलम राजा आदि मौजूद रहे।