जवां और बरौली कस्बे में सरकारी गेहूं क्रय केंद्र स्थापित हुए 22 दिन बीत गए हैं, लेकिन किसानों का गेहूं क्रय केंद्रों पर नहीं खरीदा जा रहा है। सहकारी समिति जवां में अभी तक मात्र छह क्विंटल तथा बरौली में मात्र एक क्विंटल गेहूं ही खरीदा गया है। इससे किसानों में रोष व्याप्त है और उनको अपनी मेहनत की कमाई आढ़तियों को औने-पौने भाव पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि गेहूं का सरकारी समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। बारिश ने पहले ही किसानों को बेहाल कर दिया है और अब सरकारी महकमा किसानों के खून-पसीने की मेहनत को भी नहीं खरीद रहा है। ऐसे में गरीब किसान अपने परिवार का कैसे पालन-पोषण करें और कैसे अपनी बेटी के हाथ पीले करें। क्योंकि इन कामों के लिए धन की जरूरत होती है और उनका गेहूं सरकार खरीद नहीं रही है। वहीं बरौली सहकारी समिति के सचिव बहाव का कहना है कि बारिश से गेहूं की फसल भीग गई थी। भीगने के कारण गेहूं में अभी नमी ज्यादा है। सरकार के अगले आदेशों से ही अभी गेहूं की खरीद नहीं की जा रही है।