केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और रालोद विधान मंडल दल के नेता ठा.दलवीर सिंह की मुलाकात ने सियासत गरमा दी है। भाजपा के नेता लगातार ठा. दलवीर सिंह से पूछ रहे हैं कि क्या वो बरौली विधानसभा से भाजपा के उम्मीदवार बनने जा रहे हैं..?
क्या रालोद का भाजपा से गठबंधन हो रहा है..? क्या वो इसके सूत्रधार बनने जा रहे हैं..? इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने ही कांग्रेस से गठबंधन की बता आगे बढ़ाई थी और बाद में रालोद मुखिया चौ. अजित सिंह ने कांग्रेस से गठबंधन कर ही चुनाव लड़ा था।
ऐसे ही कई सवालों के ठा. दलवीर सिंह ने बड़ी बेबाकी से जवाब दिए। पेश है बातचीत के कुछ खास अंश।
अमर उजाला: आपकी केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कब और कहां हुई..? क्या बात हुई..? क्या आप भाजपा में शामिल हो रहे हैं..?
जवाब: 29 सितंबर गुरुवार दोपहर को मैं केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलने गृह मंत्रालय नई दिल्ली गया था।
वहां पर एक घंटे तक बात हुई। उसी वक्त भारत ने पाक अधिकृत गुलाम कश्मीर पर सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी। मैं भी आतंकवादियों पर हमला करने की सलाह देने गया था, ताकि सेना का मनोबल बढ़े लेकिन इससे पहले केंद्रीय केबिनेट फैसला कर चुकी थी और सेना ने इसको अंजाम दे दिया था।
मेरी विधानसभा के सीआरपीएफ जवान की पेंशन का केस भी मिलने की वजह था। इसके अलावा पास्को, दहेज और हरिजन एक्ट में संशोधन की बात करने गया था। मेरे भाजपा में शामिल होने जैसी कोई बात वहां पर नहीं हुई।
अमर उजाला : क्या राजनाथ सिंह से आपके नजदीकी संबंध हैं..? पुरानी दोस्ती है..?
जवाब : हां.. मैं राजनाथ सिंह के साथ मंत्री रहा हूं। हमारी दोस्ती सियासी है। विचारधारा की नहीं है।
अमर उजाला : क्या आप बरौली से भाजपा का टिकट मांग रहे हैं..? भाजपा में जा रहे हैं..?
जवाब : 72 वर्ष की उम्र में केवल विधायक बनने के लिए मैं भाजपा या किसी और दल में जाने की सोच भी नहीं सकता। रालोद मुखिया चौ. अजित सिंह मुझ पर बहुत भरोसा करते हैं..। उनका भरोसा तोड़ने का साहस नहीं दिखा सकता, क्योंकि मैं विधायक ही नहीं हूं रालोद विधानमंडल दल का नेता हूं। विधानसभा में प्रदेश के पांच महत्वपूर्ण नेताओं में शुमार हूं।
अमर उजाला : रालोद का विधानसभा चुनाव 2017 में किस दल से गठबंधन होगा..?
जवाब : रालोद का गठबंधन किस दल से होगा..? इसका फैसला केवल रालोद के मुखिया चौ. अजित सिंह ही करेंगे। ये जरूर कहूंगा कि रालोद से गठबंधन करने वाला दूसरा कोई भी दल फायदे में रहेगा।
चाहे वह कांग्रेस, भाजपा या सपा में से कोई भी हो। रालोद के साथ बनने वाला गठबंधन ही सत्ता में आएगा। रालोद पूरे प्रदेश में 50 विधानसभा सीटों पर बेहद निर्णायक भूमिका में है। अगर हम सभी पचास सीटें नहीं जीत पाये तो कुछ पर जीतने के बाद बाकी सीटों पर अपने प्रतिद्वंद्वी को सौ फीसदी हरा देंगे।
अमर उजाला : अलीगढ़ में रालोद की सात विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी तय हो गए हैं..? घोषणा कब तक होगी..?
जवाब : बरौली से मैं खुद चुनाव लड़ रहा हूं।
खैर से भगवती प्रसाद सूर्यवंशी और इगलास से भी सीटिंग विधायक कन्हैयालाल दिवाकर ही चुनाव लड़ेंगे। जिला पंचायत सदस्य बबीता सिंह के पति सुबोध सिंह, पूर्व विधायक सत्यपाल सिंह और अन्य कुछ नेता अतरौली, कोल और शहर सीट पर दावेदार हैं। प्रत्याशियों पर अंतिम मुहर चौ. अजित सिंह ही लगाएंगे। इसके बाद ही प्रत्याशी घोषित होंगे।
संभवत: गठबंधन के बाद ही प्रत्याशी फाइनल होंगे। लेकिन रालोद अपनी वर्तमान सीटों पर जीते हुए विधायकों को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा।
अमर उजाला : सपा में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके चाचा अखिलेश यादव के बीच मचे घमासान पर आप क्या सोचते हैं..?
जवाब : निसंदेह सीएम युवा और तेजस्वी हैं, वह टू इन वन हैं। एक अच्छे प्रदेश अध्यक्ष और एक बेहतरीन सीएम। आने वाले चार दशक तक वो बहुत सफल नेता रहेंगे। जिस तरह से रालोद में जयंत चौधरी बहुत ओजस्वी हैं और वह भविष्य में यूपी के सीएम भी बनेंगे।
सपा में पॉवर की कलह कई महीनों से अंदर ही अंदर हो रही थी, अब सड़क पर आ गई है।