प्रदेश सरकार की नई आबकारी नीति पहली अप्रैल से लागू होने जा रही है। जिसमें ‘मय’ के शौकीन आयकरदाताओं को एक विशेष सुविधा से नवाजा जा रहा है। 20 फीसदी की दर से आयकर अदा करने वाले करदाता अब अपने घर में एक साल के लिए मिनी बार बना सकेंगे। जिसका उनको बाकायदा लाइसेंस जारी होगा। इसको इंडीविचुअल होम लाइसेंस कहा जाएगा। शासन के रणनीतिकारों का मानना है कि इंडीविचुअल होम लाइसेंस बहुत जल्द ही राजस्व का बड़ा माध्यम बन सकेगा।
इस निजी घरेलू बार में करदाता अपने इस्तेमाल के लिए महंगे और गुणवत्तायुक्त देशी विदेशी ब्रांड रख सकेंगे। जिसमें न्यूनतम 1750 रुपये प्रति बोतल की कीमत वाली शराब और न्यूनतम 470 रुपये लीटर वाली बियर रखी जा सकेगी। इससे कम कीमत का उत्पाद नहीं रखा जा सकेगा। इसमें व्हिस्की, रम, जिन, वोदका, ब्रांडी की एक-एक बोतल स्टाक में रखी जा सकेगी। ये मात्रा कुछ कम ज्यादा भी हो सकती है। ये लाइसेंस केवल निजी आवास के लिए जारी होगा। होटल, रेस्टोरेंट, बार या फार्म हाउस सहित किसी भी सार्वजनिक स्थल के लिए इसका प्रयोग नहीं किया जा सकेगा।
जिला आबकारी अधिकारी धीरज शर्मा ने बताया कि नई आबकारी नीति के अनुसार जिन लोगों ने पांच साल तक आयकर का रिटर्न जमा किया है और जो लोग लगातार तीन साल से 20 फीसदी की दर से आयकर चुका रहे हैं। ऐसे प्रतिष्ठित व्यक्ति ही 12 हजार रुपये की लाइसेंस फीस और 51 हजार रुपये की सिक्योरिटी मनी जमा करा कर लाइसेंस बनवा सकते हैं। प्रदेश में पहली बार इस तरह की सुविधा आयकरदाताओं के लिए लागू की गई है। इससे पहले से ओकेजनल बार लाइसेंस शादी समारोहों के लिए एक दिन के लिए जारी होते हैं।
कोरोना काल में आधे हुए ओकेजनल लाइसेंस
अलीगढ़। कोरोना काल में ओकेजनल बार लाइसेंसों की संख्या आधी हो गई थी। वित्तीय वर्ष 2019-20 में 152 लाइसेंस बने थे, तो वित्तीय वर्ष 2020-21 में केवल 70 ही बने। पहले ओकेजनल बार लाइसेंस की फीस चार हजार रुपये थी। वित्तीय वर्ष 2018-19 में इसको बढ़ा कर 11 हजार रुपये कर दिया गया। 2021-22 में इसको 12 हजार रुपये करने की तैयारी है। ओकेजनल बार लाइसेंस अक्सर शादी समारोहों या अन्य कार्यक्रमों के लिए एक दिन के बनवाए जाते हैं।