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कोरोना से डर नहीं लगता साहब, कवियों से लगता है

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आनलाइन कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करते अशोक चक्रधर। - फोटो : CITY OFFICE
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काका हाथरसी की जयंती पर काका कुटुंब परिवार के बैनर तले उनके पौत्र अशोक गर्ग ने शुक्रवार को आनलाइन कवि सम्मेलन किया। जिसमें पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा, पद्मश्री प्रो. अशोक चक्रधर, अरुण जैमिनी, सरदार मनजीत सिंह, चिराग जैन आदि ने प्रतिभाग किया। इस दौरान काका हाथरसी के साथ पद्म भूषण गोपाल दास नीरज को याद किया गया। इस दौरान हास्य व्यंग्य करते हुए अरुण जैमिनी ने कहा कि कोरोना से डर नहीं लगता साहब, कवियों से लगता है। ऐसा कोरोना काल में लोग कह रहे हैं।
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पद्मश्री अशोक चक्रधर ने कहा कि इस राजमार्ग पर कहीं दिखती न छांव है, बस यह तो रहा सामने अपना है गांव है। लगता है कि कालीन पर ही चल रहा हूं में, छाले नहीं हैं पांव में, छालों में पांव है। सरदार मनजीत सिंह ने कोरोना काल के प्रसंग सुनाते हुए खूब ठहाके लगवाए। हंसी ठिठोली के बीच यह कार्यक्त्रस्म दो घंटे तक चला। यहां कवियों ने काका हाथरसी के साथ बिताए हुए समय के संस्मरण भी सुनाए। चिराग जैन ने संचालन करते हुए बृज क्षेत्र की रचनाएं सुनाईं। अशोक गर्ग ने काका हाथरसी की रचनाएं और खटमल-मच्छर युद्ध कविता पढ़कर खूब ठहाके लगवाए। सुरेंद्र शर्मा ने अपने चिर परिचित अंदाज में खूब तालियां बटोरी। उन्होंने अपना काव्यपाठ काका हाथरसी के संस्मरण सुनाकर शुरू किया।
संगीत विधा में दिया जाएगा काका हाथरसी पुरस्कार
कवि सम्मेलन में कवियों ने कहा कि काका हाथरसी पुरस्कार दिया जाता है। यह संगीत के क्षेत्र में अभी तक नहीं दिया जा रहा है। इस पर अशोक गर्ग ने कहा कि काका हाथरसी पुरस्कार ट्रस्ट की बैठक आयोजित कर निश्चित ही संगीत के क्षेत्र में भी पुरस्कार वितरित किये जाएंगे।
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पूरे देश से जुड़े लोग
फेसबुक पर लाइव के दौरान उत्तर प्रदेश ही नहीं, बंगाल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से इस कवि सम्मेलन में लोगों ने प्रतिभागिता की। सैकड़ों लाइक के साथ लोगों ने कमेंट भी किए।
हाथरस के बुजुर्गों के लिए रखा जाएगा विजिटर रजिस्टर
सम्मेलन में पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा के आह्वान पर तय किया गया कि हाथरस में एक विजिटर रजिस्टर रखा जाएगा। जिसमें बुजुर्गों से उनके संस्मरण लिखवाए जाएंगे। इससे बुजुर्गों की काका के साथ जुड़ी यादें इतिहास बन जाएंगी।
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