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Aligarh: दो साल की बेटी को पास छोड़ मां गई थी पशुओं का चारा लाने, चारपाई सहित जिंदा जल गई एक माह की मासूम

Tue, 16 Jun 2026 05:23 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

गांव कटरा मलोई निवासी गीता देवी ने बताया कि सुबह चूल्हे पर खाना बनाने के बाद आग बुझा दी थी। चूल्हे को परात से ढक दिया था ताकि राख न उड़े। इसके बाद चूल्हे से करीब पांच मीटर दूर गैलरी में एक माह की बेटी को चारपाई पर सुलाया और दो साल की बेटी दिव्या को उसके पास छोड़कर चारा लाने के लिए खेतों पर गई थी।
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जली हुई चारपाई - फोटो : संवाद
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विस्तार
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विजयगढ़ के ग्राम पंचायत कटरा मलोई में 15 जून की सुबह करीब 10:00 बजे घर के अंदर गैलरी में सो रही एक माह की मासूम चारपाई सहित जिंदा जल गई। पास में दो साल की छोटी बेटी को छोड़कर उसकी मां पशुओं का चारा लाने खेतों पर गई थी।

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गांव कटरा मलोई निवासी गीता देवी ने बताया कि सुबह चूल्हे पर खाना बनाने के बाद आग बुझा दी थी। चूल्हे को परात से ढक दिया था ताकि राख न उड़े। इसके बाद चूल्हे से करीब पांच मीटर दूर गैलरी में एक माह की बेटी को चारपाई पर सुलाया और दो साल की बेटी दिव्या को उसके पास छोड़कर चारा लाने के लिए खेतों पर गई थी। बाहर से दरवाजे की कुंडी लगा दी थी, ताकि दिव्या घर के बाहर न चली जाए।

धुआं देख पड़ोसी महिला ने खोली थी कुंडी
गीता देवी के अनुसार घर से धुआं निकलते देखकर पड़ोस की एक महिला कुंडी खोलकर अंदर गई थी। उसने जली हुई चारपाई तो देखी लेकिन चारपाई के नीचे जली पड़ी मासूम बेटी पर उसकी नजर नहीं गई। दरवाजा खुलने पर बच्ची दिव्या पड़ोसी महिला को कुछ बताने के बजाय भागकर अपनी मां के पास आ गई और चारपाई में आग लगने की बात बताई। वह भागते हुए पहुंची तो चारपाई के जले बांधों के साथ जली मासूम बेटी नीचे पड़ी थी। महिला गीता का कहना है कि आग कैसे लगी यह नहीं पता, क्यों कि पास में न कोई दीपक जल रहा था, न बिजली का तार-बोर्ड आदि था। पति तीन वर्ष की सबसे बड़ी बेटी को लेकर तीन दिन पहले ननद के यहां चले गए थे। पुलिस को खबर दिए बिना ही परिवार ने बेटी के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। एसओ विजयगढ़ हेमंत मावी ने हादसे की जानकारी होने से इन्कार किया है।
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सिलिंडर न मिलने से लकड़ी पर बनता है खाना
विजयगढ़। गीता देवी ने बताया कि उनके ससुर ने गैस सिलिंडर और चूल्हा लिया था। कभी गैस चूल्हे पर, कभी लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनता था। सास-ससुर का निधन हो गया है और सिलिंडर के कागज नहीं मिले। ब्लैक में ही सिलिंडर खरीदते थे। इधर कुछ माह से सिलिंडर नहीं मिल रहा तो लगातार चूल्हे पर ही खाना बन रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि परात से ढके चूल्हे के पास ही माचिस की पांच-छह जली हुई तीलियां पड़ी थीं।

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