विद्युत वितरण व्यवस्था पर रविवार रात करीब आठ बजे आई आंधी कहर बनकर टूटी। पूरे शहर की आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त होने में करीब 20 घंटे का वक्त लगा। सबसे अधिक समस्या गांधी पार्क, किला रोड व मेडिकल रोड बिजलीघरों में रही, इस क्षेत्र की एक लाख से अधिक आबादी ने शाम चार बजे तक विद्युत संकट झेला। इसके अलावा, देहात के कुछ फीडर तो ऐसे हैं, जिनमें सोमवार देर शाम तक ब्रेकडाउन दुरुस्त करने का प्रयास होता रहा। वहीं, उमस भरी गर्मी से बेहाल लोगों ने रविवार रात को बिजलीघरों पर हंगामा किया। सोमवार को दिन में बिजली न आने से लोगों को पानी संकट से जूझना पड़ा।
रविवार देर शाम आई आंधी के बीच एहतियातन विद्युत आपूर्ति बंद कर दी गई थी। मगर आंधी थमने पर जब आपूर्ति शुरू की गई तो पता चला कि शहर और देहात की सभी 33 केवीए लाइनें ठप थीं। इसके चलते पूरा जिला अंधेरे में डूब गया। इस पर तत्काल विद्युत पेट्रोलिंग टीमों को सक्रिय किया गया। रात भर टीमों ने शहर व देहात इलाकों में पेट्रोलिंग कर फॉल्ट तलाशने और उन्हें दुरुस्त करने का प्रयास शुरू किया। कई जगह लाइनें एक दूसरे पर टूटकर गिरने और खंभे गिरने के कारण समस्या जटिल हो गई। धीरे-धीरे आपूर्ति दुरुस्त करना शुरू किया गया।
शहर का 50 फीसदी हिस्सा रात दो बजे के आसपास दुरुस्त कर लिया गया था लेकिन शहर के मेडिकल रोड, किला रोड, गांधी पार्क, औद्योगिक आस्थान, गूलर रोड, शांति निकेतन, रमेश विहार, इंजीनियर्स कॉलोनी, कुलदीप विहार, ओजोन सिटी, गांधी पार्क इलाकों में आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। यहां फॉल्ट अधिक होने और 33 केवीए, 11 हजार केवीए व एलटी लाइन से जुड़े खंभे टूटने के कारण समस्या अधिक रही। हालांकि, सोमवार सुबह नौ बजे तक शहर के शेष 30 फीसदी हिस्से में आपूर्ति बहाल कर दी गई थी लेकिन मेडिकल रोड, किला रोड, गांधी पार्क बिजलीघर से जुड़े इलाकों में शाम चार बजे तक आपूर्ति शुरू हो पाई। इसके चलते इस क्षेत्र की करीब एक लाख आबादी ने 20 घंटे तक विद्युत संकट झेला। इसी तरह देहात के गभाना, अतरौली, वीरपुरा व पिसावा इलाकों में सोमवार शाम तक आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई थी। इसके चलते लोगों को गर्मी में बिजली व पानी संकट झेलना पड़ा।
गांधीपार्क पर जाम-हंगामा, स्वर्ण जयंती पर रात भर रही भीड़
बिजली संकट जूझते लोग रविवार रात करीब एक बजे गांधीपार्क बिजलीघर पर पहुंच गए, हंगामा करते हुए आगरा रोड पर जाम लगा दिया। इस खबर पर पुलिस पहुंच गई और विद्युत टीम ने लोगों को समझाकर शांत किया। आपूर्ति शुरू की गई। तब जाकर लोग वहां से लौटे। इसी तरह स्वर्ण जयंती नगर बिजलीघर में रात को रमेश विहार, इंजीनियर्स कॉलोनी के लोग रात भर जमा रहे और आपूर्ति को लेकर विद्युत टीम ने नोकझोंक चलती रही।
इनवर्टर बैठे, हाथ के पंखों के सहारे लोग
विद्युत आपूर्ति बाधित रहने और उमस भरी गर्मी से लोग रविवार की रात में बेहाल दिखे। रात में लोग सड़कों पर घूमते दिखाई दिए। घरों में इनवर्टर तक बैठ गए और छतों पर पंखे के सहारे गरमी से राहत पाते नजर आए। कई जगह तो लोग गुस्से में बिजलीघरों पर इस इंतजार में बैठे रहे कि जब तक बिजली नहीं आएगी, वे अपने घर नहीं जाएंगे।
आंधी से दो सौ से अधिक खंभे टूटने का
अनुमान, सात फीडरों में ज्यादा दिक्कत
24 घंटे चला काम, 20 लाख से अधिक का हुआ नुकसान
विद्युत वितरण व्यवस्था गड़बड़ाने के साथ-साथ पावर कार्पोरेशन को 20 लाख से अधिक का नुकसान हुआ है। रविवार को आंधी बारिश के कारण 33 केवीए, 11 केवीए व एलटी लाइन के करीब 200 से अधिक खंभे गिर गए हैं। सौ से ज्यादा जगहों पर लाइनों पर पेड़ टूटकर गिरे हैं। अनगिनत जगह तार टूटे हैं। सारसौल इलाके में तो दो खंभों पर रखा ट्रांसफार्मर गिर गया। सात फीडरों में सबसे ज्यादा दिक्कत आई। व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए टीमें पिछले 24 घंटे से जुटी रहीं। सबसे अधिक दिक्कत सात फीडरों में रही, जिन्हें देर शाम तक दुरुस्त किया जाता रहा।
पावर कार्पोरेशन अलीगढ़ जोन के मुख्य अभियंता एसके अग्रवाल व नगर क्षेत्र के अधीक्षण अभियंता एसके जैन बताते हैं कि पिछले कई वर्ष में आंधी से इतना बड़ा नुकसान देखने को नहीं मिला है। कई साल के रिकार्ड टूटे हैं। सभी अभियंता व वरिष्ठ अधिकारी रात भर मॉनीटरिंग करते रहे। दिन में भी रात को काम करने वाली टीमों को लगाया गया, तब जाकर आपूर्ति दुरुस्त हो पाई है। देहात में कुछ जगहों पर देर शाम तक काम जारी था।
राजस्व वसूली के लक्ष्य में न पिछड़ जाए जिला
रविवार शाम को हुए इस घटनाक्रम के चलते सोमवार को राजस्व वसूली का काम नहीं हो सका। चूंकि मंगलवार को महीने का आखिरी दिन है। इसलिए पूरी टीम को मंगलवार को राजस्व वसूली में लगाया जा रहा है। तय किया जा रहा है कि हर हाल में लक्ष्य पूरा करना है।