जेएन मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. एसए आजमी ने कहा कि शिजोफ्रेनिया एक मानसिक रोग है। हर 100 में से एक व्यक्ति इस रोग से पीड़ित है। यह रोग मस्तिष्क में महत्वपूर्ण रसायनिक तत्वों (सेरोटोनिन एवं डोपामीन) की असामान्य कमी के चलते होता है।
प्रो. आजमी मंगलवार को शिजोफ्रेनिया दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। लोगों में इस रोग के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए स्लोगन लेखन प्रतियोगिता हुई। जिसमें इंटर्न डॉ. शमा परवीन, डॉ. फैसल शान और डॉ. शकील अहमद को विजेता घोषित किया गया।
प्रो. आजमी ने कहा कि ज्यादातर मामलों में इस रोग की शुरुआत 17 से 27 वर्ष की आयु में होती है। लेकिन यह रोग किसी भी आयु में हो सकता है। इससे पीड़ित व्यक्ति के कानों में आवाजें गूंजती हैं। उसके सोचने एवं महसूस करने की शक्ति क्षीण होने लगती है। अकसर रोगी कुछ न कुछ बुदबुदाते रहता है। कभी रोता है, तो कभी बिना कारण हंसता है। कभी रातभर जागता है तो कभी चुप्पी साध लेता है। वर्तमान में कई ऐसी दवाएं हैं, जो इस रोग को ठीक कर देती हैं। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. हारिस एम खान, प्रो. एम शुएब जहीर आदि मौजूद थे।